
Palamu: पलामू वाणिज्य-कर (टैक्स) अंचल में करीब 1.22 करोड़ रुपये के संदिग्ध इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम को लेकर हड़कंप मच गया है। विभागीय जांच में सामने आई गड़बड़ियों के बाद वाणिज्य-कर विभाग की संयुक्त सचिव ने 10 जुलाई 2026 को राज्य-कर संयुक्त आयुक्त, पलामू अंचल को पत्र भेजकर दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई और मामले से जुड़े 32 अन्य करदाताओं के रिकॉर्ड खंगालने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। इस खुलासे के बाद से विभाग और स्थानीय कारोबारियों के बीच हड़कंप का माहौल है।

ऑपरेटर राकेश प्रसाद पर गिरी गाज, शिकायत से खुली पोल
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत डाटा एंट्री ऑपरेटर राकेश प्रसाद के खिलाफ मिली गंभीर शिकायतों से हुई थी। शिकायतों की जांच के लिए विभाग द्वारा गठित दो सदस्यीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कई चौंकाने वाली अनियमितताओं की पुष्टि की। जांच रिपोर्ट के आधार पर अब कार्रवाई का दायरा केवल एक कर्मचारी तक सीमित न रहकर 32 अन्य करदाताओं के रिकॉर्ड तक फैल गया है। ऑपरेटर पर विभागीय गोपनीय जानकारी लीक करने और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के भी गंभीर आरोप हैं, जिसकी विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

कागजी लेनदेन और ‘साइड सेटलमेंट’ की आशंका
जांच का मुख्य केंद्र बिंदु यह पता लगाना है कि 1.22 करोड़ रुपये का यह ITC वास्तविक खरीद-बिक्री के आधार पर क्लेम किया गया था या यह महज फर्जी और कागजी इनवॉइस का खेल है। विभाग को आशंका है कि बिना किसी सामान या सेवा की डिलीवरी के केवल कागजों पर फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल जनरेट कर टैक्स में हेरफेर किया गया है। इसके अलावा इनवॉइस की मूल राशि कम दिखाकर बैकडोर से ‘साइड सेटलमेंट’ करने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इसके लिए बैंक अकाउंट्स, जीएसटी रिटर्न और माल की वास्तविक आवाजाही की क्रॉस-चेकिंग की जा रही है।
4,880 महिलाओं की मंईयां सम्मान राशि के बराबर की रकम
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि संदिग्ध 1.22 करोड़ रुपये की यह रकम झारखंड सरकार की ‘मंईयां सम्मान योजना’ के तहत मिलने वाली 2,500 रुपये की मासिक सहायता के हिसाब से करीब 4,880 महिलाओं की एक महीने की राशि के बराबर बैठती है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि पूरी जांच प्रक्रिया संपन्न होने के बाद ही सरकारी राजस्व के वास्तविक नुकसान का सटीक आंकड़ा सामने आ सकेगा।
32 करदाताओं की जांच से बड़े सिंडिकेट का हो सकता है खुलासा
विभागीय सूत्रों के अनुसार, रडार पर आए 32 करदाताओं के जीएसटी रिटर्न, बैंकिंग लेनदेन और ई-वे बिल का पैटर्न एक-दूसरे से मिलता-जुलता दिखाई दे रहा है। जांच अधिकारी अब यह देख रहे हैं कि क्या इन सभी के पीछे कोई संगठित सिंडिकेट काम कर रहा था। फिलहाल विशेष जांच दल की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद दोषियों पर विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी शिकंजा भी कसा जाएगा।
रिपोर्ट – विक्रम यादव, पलामू


