
Ranchi: बहुचर्चित 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा फर्जीवाड़ा मामले में आरोपी और परीक्षा का संचालन करने वाली TDPL एजेंसी के एकाउंटेंट रक्षक सिंह की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। रांची की अदालत से आरोपी को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत ने मामले की गंभीरता और जांच के पहलुओं को ध्यान में रखते हुए रक्षक सिंह की जमानत याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

लखनऊ से हुई थी गिरफ्तारी और अगस्त में लगाई थी जमानत की गुहार
प्रकरण की जांच कर रही CID की टीम ने रक्षक सिंह को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद से ही आरोपी सलाखों के पीछे है। जेल में बंद रक्षक सिंह ने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से बीते 27 अगस्त को अदालत के समक्ष जमानत के लिए अर्जी दाखिल की थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की संवेदनशीलता और जांच पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए उसे राहत देने से साफ इनकार कर दिया।

परीक्षा संचालन की मुख्य जिम्मेदारी निभा रही एजेंसी की संदिग्ध भूमिका
उल्लेखनीय है कि 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा के सुचारू और पारदर्शी संचालन की मुख्य जिम्मेदारी TDPL एजेंसी के पास ही थी। जांच एजेंसियों के मुताबिक, परीक्षा संचालन के दौरान गोपनीयता भंग करने और बड़े पैमाने पर गड़बड़ी फैलाने में एजेंसी के कर्मियों की भूमिका प्रमुख रही है। इस घोटाले के सामने आने के बाद से ही CID की टीम एक-एक कर कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है।
तत्कालीन अध्यक्ष समेत 20 से अधिक आरोपी जा चुके हैं सलाखों के पीछे
राज्य की इस सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में हुए फर्जीवाड़े के बाद से ही जांच एजेंसियों का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। मामले की तह तक पहुंचने के क्रम में CID अब तक कई बड़े नामों पर कार्रवाई कर चुकी है। इस बहुचर्चित परीक्षा घोटाले में JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष एल ख्यागते समेत अब तक 20 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जमानत अर्जी खारिज होने के बाद अब आरोपी रक्षक सिंह को फिलहाल जेल में ही रहना पड़ेगा।


