
Nepal Flood: नेपाल में रसुवा की भोटेकोसी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के वैज्ञानिक कारण और पुख्ता सबूत जुटाने के लिए नेपाल सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। ऊर्जा, जलस्रोत तथा सिंचाई मंत्रालय ने बुधवार को जल नीति विशेषज्ञ देवेश बेल्बासे की अगुवाई में सात सदस्यों वाली एक हाई-लेवल एक्सपर्ट स्टडी कमेटी का गठन कर दिया है।

इस कमेटी में जल विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्रमान शाक्य, ग्लेशियोलॉजिस्ट डॉ. रिज़नभक्त कायस्थ, रिमोट सेंसिंग एक्सपर्ट डॉ. उत्तमबाबु श्रेष्ठ, भूगर्भविद् डॉ. मेघराज धिताल, हाइड्रोपावर इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञ डॉ. हरि पंडित और आपदा जोखिम न्यूनीकरण विशेषज्ञ अनिल पोखरेल को शामिल किया गया है।

बाढ़ के उद्गम स्थल से लेकर पूरे तटीय क्षेत्र का होगा जमीनी अध्ययन

मंत्रालय के प्रवक्ता मोहन शाक्य ने बताया कि यह टीम उस जगह का दौरा करेगी जहां से बाढ़ की शुरुआत हुई थी और वहां से लेकर पूरे तटीय इलाके का जमीनी जायजा लेगी। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य भोटेकोसी बाढ़ की उत्पत्ति, हिमालयी भू-जोखिमों, पूरे घटनाक्रम और इसमें क्लाइमेट चेंज (जलवायु परिवर्तन) की भूमिका का वैज्ञानिक विश्लेषण करना है।
इससे पहले जलविज्ञान एवं जलस्रोत अनुसंधान केंद्र ने एक शुरुआती स्टडी की थी, लेकिन उसमें इस बात के पर्याप्त सबूत नहीं मिल सके थे कि रसुवा में आपदा की शुरुआत असल में कहां से और किस प्रक्रिया के तहत हुई। इसलिए एक्सपर्ट्स ने सलाह दी थी कि क्लाइमेट चेंज को सीधे जिम्मेदार ठहराने से पहले वैज्ञानिक जांच बेहद जरूरी है।
तीन चरणों में पूरा होगा यह बड़ा अध्ययन
यह जांच प्रक्रिया कुल तीन चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में उच्च हिमालयी क्षेत्र से लेकर ल्हेन्दे-भोटेकोसी नदी प्रणाली तक घटना के समयक्रम, ग्लेशियरों की स्थिति, चट्टानों व मिट्टी के खिसकने और बाढ़ के बहाव का अध्ययन होगा।
दूसरे चरण में बाढ़ के तुरंत बाद बने हालात और उसके पीछे की वजहों को समझा जाएगा। वहीं तीसरे और अंतिम चरण में इस बात का वैज्ञानिक मूल्यांकन होगा कि इंसानी गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन ने इस आपदा की तीव्रता या संवेदनशीलता को कितना बढ़ाया।
ड्रोन और सैटेलाइट से रखी जाएगी नजर, 2 महीने में देनी होगी रिपोर्ट
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मंत्रालय के अनुसार विशेषज्ञों की यह टीम घटना स्थल का स्थलीय निरीक्षण करेगी। इस दौरान विस्तृत फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर ड्रोन और सैटेलाइट तस्वीरों की भी मदद ली जाएगी।
इस पूरी स्टडी को पूरा करने के लिए कमेटी को 2 महीने का वक्त दिया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद नेपाल का ऊर्जा मंत्रालय भोटेकोसी बाढ़ की सही प्रकृति को सार्वजनिक करेगा और इसे एक आधिकारिक वैज्ञानिक नाम भी देगा।


