
Giridih : गिरिडीह जिले का धनवार इलाका जहां अपनी अनोखी छठ पूजा की सजावट के लिए पूरे राज्य में मशहूर है, वहीं दुर्गा पूजा के मौके पर यहां तैयार होने वाले पंडाल भी हर साल जबरदस्त सुर्खियां बटोरते हैं। इस बार धनवार नगर पंचायत क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए भक्ति और कला का बेहद शानदार नजारा पेश किया गया है। यहां वृंदावन के प्रसिद्ध प्रेम मंदिर की भव्य प्रतिकृति के साथ-साथ भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के अलौकिक स्वरूप को साकार किया गया है। शनिवार को जिले के DC रामनिवास यादव और SP डॉक्टर विमल कुमार खुद पंडाल की भव्यता का दीदार करने धनवार पहुंचे। पंडाल की नक्काशी और कारीगरी की बारीकियों को देखकर दोनों आला अधिकारी मुरीद हो गए और आयोजकों की जमकर तारीफ की। इस मौके पर पूजा समिति के पदाधिकारियों ने DC और SP का स्वागत माता की चुनरी ओढ़ाकर पूरे आदर-सत्कार के साथ किया।

1932 से चला आ रहा ऐतिहासिक सफर, ब्रिटिश दौर की परंपरा आज बनी धनवार की पहचान


इस भव्य आयोजन के ऐतिहासिक महत्व पर बात करते हुए पूजा समिति के अध्यक्ष अमित कुमार ने बताया कि धनवार में दुर्गा पूजा का आयोजन कोई नया सिलसिला नहीं है, बल्कि यह परंपरा साल 1932 से लगातार चली आ रही है। ब्रिटिश शासनकाल के दौरान स्थानीय लोगों ने मिलकर जिस पूजा की शुरुआत एक छोटे स्तर पर की थी, वह पिछले 94 सालों में विकसित होकर आज एक विशाल मेले और भव्य उत्सव का रूप ले चुकी है। हर साल की तरह इस बार भी यहां लगने वाले विशाल मेले और पंडाल के दर्शन के लिए गिरिडीह ही नहीं, बल्कि आसपास के कई अन्य जिलों से भी भारी तादाद में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
बंगाल के कारीगरों की नायाब कारीगरी, विजयादशमी से शुरू होगा भक्ति संगीत का महासंगम
पूजा समिति के अध्यक्ष ने आगे बताया कि इस अद्भुत पंडाल को जीवंत रूप देने के लिए बंगाल से आए कुशल और अनुभवी कारीगरों की टीम दिन-रात जुटी रही। प्रेम मंदिर की बारीकियों से लेकर 12 ज्योतिर्लिंगों के दिव्य स्वरूप और दीवारों पर उकेरी गई खास कलाकृतियों को इतने सलीके से गढ़ा गया है कि श्रद्धालु देखते ही मंत्रमुग्ध हो जा रहे हैं। उत्सव के इस पूरे माहौल को और ज्यादा रूहानी बनाने के लिए विजयादशमी के पावन दिन से खास सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत होगी। इसके तहत बंगाल के जाने-माने भजन गायक और कलाकारों का दल धनवार पहुंचेगा, जो अपने मधुर भजनों से पूरे क्षेत्र को भक्तिमय माहौल में सराबोर करेंगे।


