
Rajasthan: राजस्थान के फलोदी जिले में बोरवेल में गिरे 9 साल के भोमाराम को बचाने की कोशिशें आखिरकार नाकाम हो गईं. करीब 39 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद शनिवार तड़के उसे बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी. बच्चे को तुरंत लोहावट अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. इस खबर के बाद परिवार और गांव में मातम छा गया.


15 अक्टूबर को बोरवेल में गिरा था बच्चा
यह हादसा फलोदी जिले की ग्राम पंचायत नौसर के अंतर्गत पूनिया की ढाणी में हुआ था. 15 अक्टूबर को दोपहर करीब 12:30 बजे भोमाराम खेत में बने बोरवेल में गिर गया. बताया गया कि बोरवेल करीब 1,050 फीट गहरा था और बच्चा लगभग 640 फीट की गहराई पर फंसा हुआ था. घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन के साथ NDRF और SDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं और बचाव अभियान शुरू किया.

रास्ते में फंसे पत्थर ने बढ़ाई मुश्किल
रेस्क्यू टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती बच्चे से करीब 30 फीट ऊपर फंसा एक भारी पत्थर था. इसके कारण बचाव अभियान में लगातार बाधाएं आ रही थीं. काफी कोशिशों के बाद भी जब सफलता नहीं मिली, तो देसी जुगाड़ के विशेषज्ञ माधाराम सुथार और उनकी टीम ने मोर्चा संभाला. टीम ने लोहे की सरियों से विशेष जाल तैयार किया और मेहनत के बाद पत्थर को बाहर निकाला.
इसके बाद बचाव अभियान फिर तेज किया गया. शनिवार तड़के 3:35 बजे भोमाराम को बोरवेल से बाहर निकाल लिया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी.

मासूम की मौत से गांव में शोक
भोमाराम के सुरक्षित बाहर आने की उम्मीद लगाए बैठे परिजनों को उसकी मौत की खबर ने तोड़ दिया. शव देखते ही परिवार के लोग बिलख पड़े.
यह हादसा खुले और असुरक्षित बोरवेल से होने वाले खतरों की ओर फिर ध्यान दिलाता है. ऐसे हादसों को रोकने के लिए खुले बोरवेल को सुरक्षित तरीके से बंद करना और सुरक्षा नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है.


