
Bokaro: बोकारो स्टील प्लांट में विस्थापितों के नियोजन आंदोलन के चलते पिछले दो दिनों से ठप पड़ी व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए जिला प्रशासन ने रविवार सुबह बड़ा कदम उठाया. प्लांट के अंदर मौजूद जहरीली गैसों और उनके संभावित लीकेज के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने मोर्चा संभाला और मुख्य गेट को खुलवा दिया. गेट खुलते ही सुबह की ‘ए’ शिफ्ट के कर्मचारियों की आवाजाही शुरू हो सकी.

मौके पर पहुंचे SDM और ASP
चास एसडीएम प्रांजल ढांडा और एएसपी वेदांत शंकर खुद भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे. उन्होंने वहां डटे आंदोलनकारियों से सीधी बातचीत की और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए मुख्य गेट खाली कराया. एसडीएम ने दो टूक कहा कि प्लांट के भीतर कई तरह की जहरीली गैसें मौजूद हैं और अगर संचालन ज्यादा देर ठप रहा तो लीकेज जैसी गंभीर घटना हो सकती है. उन्होंने यह भी साफ किया कि स्थिति सामान्य रखने के लिए जरूरत पड़ने पर बाकी गेट भी इसी तरह खुलवाए जाएंगे.

150 जवानों की तैनाती, धरने पर रोक नहीं
प्लांट परिसर और आसपास विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं. एएसपी ने जानकारी दी कि जगुआर, होमगार्ड और जिला पुलिस बल के करीब 150 जवानों को तैनात किया गया है. पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से स्पष्ट कहा कि वे अपनी तय जगह पर शांतिपूर्ण तरीके से धरना जारी रख सकते हैं, उसमें प्रशासन को कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन प्लांट के रोजमर्रा के कामकाज और कर्मचारियों की आवाजाही को रोकना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
रोजाना 30 करोड़ रुपये की चपत
दो दिनों तक मुख्य गेट जाम रहने और कर्मचारियों के भीतर न जा पाने से प्लांट में उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ था. प्रबंधन के मुताबिक, इस गतिरोध के चलते कंपनी को हर दिन करीब 30 करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था. ऐसे में मुख्य गेट खुलने और सुरक्षाबलों की तैनाती के बाद अब उत्पादन धीरे-धीरे सामान्य होने की उम्मीद जगी है.


