
New Delhi : राजधानी दिल्ली में ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले हिरासत में लिए गए छात्र नेता नेहा बोरा और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को शनिवार को राहत मिली. नेहा बोरा को सुबह रिहा कर दिया गया, जबकि अभिजीत दीपके को शाम को सशर्त जमानत मिल गई. दोनों को शुक्रवार को प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जाते समय पुलिस ने हिरासत में लिया था.

क्या है पूरा मामला?
दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में शुक्रवार को ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च आयोजित किया जाना था. पुलिस ने प्रदर्शन के मद्देनजर पार्क को बंद कर दिया था। इसी दौरान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा और CJP प्रमुख अभिजीत दीपके को पुलिस ने हिरासत में ले लिया.

नेहा को दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत हिरासत से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शनिवार सुबह करीब 5 बजे रिहा किया गया.
वहीं, अभिजीत दीपके के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की गई. पुलिस के मुताबिक, उन पर पहले शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप था. शनिवार शाम को उन्हें विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने सशर्त जमानत दे दी. इसके लिए उन्हें शांति बनाए रखने का बॉन्ड देने को कहा गया.
क्यों निकाला जाना था तिरंगा मार्च?
यह मार्च मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन का हिस्सा था. प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के फैसलों पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.
इसके अलावा, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के लिए निर्धारित स्थल की अधिसूचना रद्द किए जाने और वहां तिरंगा लेकर पहुंचे CJP नेताओं सौरभ दास तथा आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में भी प्रदर्शन आयोजित किया गया था। दोनों नेता न्यायिक हिरासत में हैं.


