
पूर्णिया: नवरात्र के दौरान देशभर में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जा रही है। इसी बीच बिहार के पूर्णिया में स्थित एक ऐसा शक्तिपीठ श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है, जहां मां दुर्गा की प्रतिमा नहीं, बल्कि मिट्टी से बने दो उभरे हुए पिंडों की पूजा होती है। काझी हृदयनगर स्थित हृदयेश्वरी दुर्गा शक्तिपीठ के बारे में मान्यता है कि यहां माता सती का हृदय गिरा था। इसी वजह से इस मंदिर को 52 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।

मां सती के हृदय से जुड़ी है शक्तिपीठ की मान्यता
पूर्णिया के काझी हृदयनगर में स्थित हृदयेश्वरी दुर्गा मंदिर की पहचान बिहार और सीमांचल के अलावा दूसरे राज्यों और पड़ोसी देश नेपाल तक फैली हुई है। यहां बिहार, झारखंड, बंगाल और कोसी-सीमांचल के विभिन्न इलाकों के साथ नेपाल से भी श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस स्थान पर माता सती का हृदय गिरा था। इसी वजह से यहां मां भगवती को हृदयेश्वरी के रूप में पूजा जाता है। नवरात्र के दौरान मंदिर में भक्तों की भीड़ बढ़ जाती है और दूर-दराज से लोग माता के दर्शन करने पहुंचते हैं।
मंदिर में प्रतिमा नहीं, दो पिंडों की होती है पूजा
हृदयेश्वरी दुर्गा शक्तिपीठ की सबसे खास बात यहां की पूजा पद्धति है। मंदिर में मां भगवती की पारंपरिक प्रतिमा नहीं है। यहां मिट्टी से बने दो उभरे हुए पिंडों को ही मां का स्वरूप मानकर पूजा जाता है।
स्थानीय मान्यता के अनुसार, इस स्थान पर विशेष आध्यात्मिक शक्ति विद्यमान है। इसी विश्वास के कारण यहां श्रद्धालुओं के साथ-साथ तांत्रिक साधना करने वाले लोग भी पहुंचते हैं।
नवरात्र में खोयंछा भराई और विशेष पूजा की परंपरा
नवरात्र के अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। श्रद्धालु मां के चरणों में प्रसाद और चुनरी अर्पित करते हैं। इसके साथ ही पारंपरिक खोयंछा भराई की रस्म भी निभाई जाती है।
स्थानीय परंपरा के अनुसार, अष्टमी की रात विशेष निशा बलि पूजा आयोजित होती है। इसके बाद माता का पट खोला जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से मां की आराधना करने पर उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
झोपड़ी से भव्य मंदिर तक का सफर
स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले यहां मंदिर की जगह झोपड़ीनुमा घर हुआ करता था। उसी स्थान पर मां भगवती के दो पिंडों की पूजा की जाती थी। समय के साथ श्रद्धालुओं की आस्था और सहयोग से यह स्थान एक विशाल और भव्य मंदिर के रूप में विकसित हो गया।
आज हृदयेश्वरी दुर्गा शक्तिपीठ न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि अपनी अनोखी पूजा पद्धति और माता सती से जुड़ी मान्यता के कारण भी लोगों का ध्यान आकर्षित करता है।
नवरात्र में दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालु
नवरात्र के दिनों में मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। भक्त मां को चुनरी और प्रसाद चढ़ाकर पूजा-अर्चना करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
पूर्णिया का यह शक्तिपीठ अपनी विशिष्ट परंपरा, दो पिंडों की पूजा और माता सती के हृदय से जुड़ी धार्मिक मान्यता के कारण विशेष पहचान रखता है। नवरात्र के अवसर पर यहां उमड़ने वाली भीड़ स्थानीय लोगों की गहरी आस्था को दर्शाती है।
(गौरव गुप्ता की रिपोर्ट)


