
Gumla: गुमला जिले के रायडीह प्रखंड अंतर्गत सुदूरवर्ती कोब्जा क्षेत्र का डिपाटोली गांव आज के डिजिटल दौर में भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। यहां के लोग सड़क और पीने के साफ पानी की भारी किल्लत झेलने को मजबूर हैं। गांव में पेयजल की कोई व्यवस्था न होने से ग्रामीणों का जीना मुहाल हो गया है। ग्रामीणों ने कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ब्लॉक के अफसरों को इस गंभीर समस्या की जानकारी दी, लेकिन अब तक नतीजा सिफर ही रहा।

सिर पर गगरा और मीलों का पैदल सफर, चुआं से बुझ रही प्यास
गांव में पानी का कोई ठोस जरिया न होने के कारण घर की महिलाओं को रोज मीलों दूर जंगलों और नालों के पास बने चुआं (गड्ढे) तक पैदल जाना पड़ता है। महिलाएं तपती धूप और पथरीले रास्तों पर सिर पर भारी बर्तन ढोकर पानी लाती हैं। घंटों मशक्कत के बाद जो पानी मिलता है, वह भी पूरी तरह मटमैला और दूषित होता है। गंदा पानी पीने की वजह से गांव में पेट दर्द, उल्टी-दस्त और संक्रामक बीमारियों का खतरा हमेशा मंडराता रहता है, लेकिन प्यास बुझाने के लिए ग्रामीणों के पास इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।

सालों से खराब पड़ा है गांव का इकलौता चापाकल
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में लगा एकमात्र चापाकल लंबे समय से खराब होकर सफेद हाथी बना खड़ा है। चापाकल की मरम्मत के लिए कई बार ब्लॉक स्तर पर लिखित और मौखिक गुहार लगाई गई, लेकिन किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने गांव आकर देखने की जहमत तक नहीं उठाई। प्रशासन की इस बेरुखी से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और DC से मांग की है कि डिपाटोली गांव में जल्द से जल्द चापाकल की मरम्मत कराई जाए और स्थायी जलापूर्ति योजना चालू कर लोगों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराया जाए।


