
गोड्डा: शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से होने जा रही है। पितृपक्ष की समाप्ति के अगले दिन से मां दुर्गा की आराधना शुरू होगी। इसे लेकर गोड्डा जिले के बलबड्डा में तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार श्रद्धालुओं को यहां आस्था के साथ भव्य आयोजन भी देखने को मिलेगा। सूर्य सरोवर पर काशी की तर्ज पर गंगा आरती होगी तो विजयादशमी पर 65 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा।

बलबड्डा की दुर्गा पूजा का इतिहास भी बेहद खास है। यहां जमींदारी इस्टेट के समय से मां दुर्गा की पूजा की परंपरा चली आ रही है। स्थानीय मान्यता के अनुसार ऐतिहासिक दुर्गा मंदिर करीब डेढ़ सौ वर्ष से अधिक पुराना है।

डेढ़ सौ साल से चली आ रही मां दुर्गा की पूजा
बलबड्डा में जमींदारी काल से शुरू हुई दुर्गा पूजा की परंपरा आज भी कायम है। नवरात्रि आते ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है। दूर-दराज के क्षेत्रों से भी लोग मां दुर्गा के दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं। इस बार मंदिर परिसर में भव्य पंडाल तैयार किया जा रहा है। मेले को आकर्षक बनाने के लिए विशेष सजावट और रंग-बिरंगी रोशनी का भी इंतजाम किया जा रहा है।
सूर्य सरोवर पर दिखेगा काशी जैसा नजारा
इस बार बलबड्डा दुर्गा पूजा मेले के प्रमुख आकर्षणों में सूर्य सरोवर तालाब पर होने वाली भव्य गंगा आरती शामिल है।
आयोजकों के मुताबिक बनारस से आने वाले विद्वान पंडित गंगा आरती करेंगे। सूर्य सरोवर के चारों तरफ झिलमिलाती रोशनी लगाई जाएगी। आरती के दौरान तालाब और आसपास का पूरा इलाका रोशनी से जगमग नजर आएगा।
बनारस के कलाकार पेश करेंगे रासलीला
महाआरती के बाद श्रद्धालुओं के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। बनारस से आने वाले कलाकार रासलीला की प्रस्तुति देंगे।
इसके अलावा भक्ति जागरण का भी आयोजन किया जाएगा। पूजा समिति धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए इस बार के नवरात्रि उत्सव को खास बनाने की तैयारी कर रही है।
विजयादशमी पर जलेगा 65 फीट का रावण
नवरात्रि उत्सव का एक और बड़ा आकर्षण विजयादशमी पर होने वाला रावण दहन होगा।
महाआरती के बाद रामसुंदर राम हाई स्कूल बलबड्डा के ऐतिहासिक मैदान में 65 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
आस्था के साथ वर्षों पुरानी विरासत भी
बलबड्डा की दुर्गा पूजा केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है। जमींदारी काल से चली आ रही यह परंपरा स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत का भी हिस्सा बन चुकी है।
इस बार भी पूजा समिति और स्थानीय लोग आयोजन को भव्य बनाने में जुटे हैं। पंडाल, रोशनी, गंगा आरती, रासलीला, भक्ति जागरण और रावण दहन को लेकर तैयारियां अंतिम दौर में पहुंच रही हैं।


