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निचली अदालत से झटका लगने के बाद हाईकोर्ट में लगाई अर्जी, क्या सलाखों से बाहर आ पाएंगे पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांग्ते?

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Jharkhand High Court: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा में कथित धांधली और भ्रष्टाचार के बड़े मामले में सलाखों के पीछे पहुंचे राज्य के पूर्व मुख्य सचिव और JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांग्ते ने राहत पाने के लिए झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। निचली अदालत द्वारा नियमित जमानत याचिका खारिज किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए उन्होंने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की है। हालांकि अदालत की ओर से इस याचिका पर सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं की गई है। इससे पहले रांची स्थित अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत ने उनकी जमानत अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया था।

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निचली अदालत में हुई थी तीखी बहस, 2 करोड़ कमीशन का संगीन आरोप

निचली अदालत में सुनवाई के दौरान एल ख्यांग्ते की तरफ से वरीय अधिवक्ता अनिल कुमार और अधिवक्ता चंदना कुमारी ने दलीलें पेश की थीं। बचाव पक्ष का कहना था कि याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है और जांच एजेंसी द्वारा की गई छापेमारी में भी उनके खिलाफ कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई है। इसके उलट सीआईडी (CID) ने कोर्ट में कड़ा विरोध जताते हुए खुलासा किया था कि परीक्षा संचालन का जिम्मा TDPL एजेंसी को सौंपने में ख्यांग्ते की सीधी और संदिग्ध भूमिका रही है। जांच एजेंसी का आरोप है कि उन्हें भली-भांति पता था कि एजेंसी पारदर्शी तरीके से परीक्षा नहीं ले रही है, फिर भी उन्होंने कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया। जांच में ख्यांग्ते पर TDPL से कथित तौर पर 2 करोड़ रुपये का भारी कमीशन लेने का सनसनीखेज आरोप भी लगाया गया है।

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कांड संख्या 16/2026 में हुई थी गिरफ्तारी, 20 से ज्यादा आरोपी जेल में

सीआईडी ने प्रतियोगी परीक्षा में बड़े पैमाने पर हुई अनियमितताओं को लेकर कांड संख्या 16/2026 के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। इसी केस की तफ्तीश के दौरान कड़ियां जुड़ते ही जांच एजेंसी ने पूर्व मुख्य सचिव को गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तारी के बाद अदालत से पुलिस रिमांड हासिल कर उनसे गहन पूछताछ की गई, जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार भेज दिया गया था। जांच एजेंसी इस भर्ती घोटाले में अब तक 20 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे भेज चुकी है।

किंगपिन अभय तिवारी के कबूलनामे ने बढ़ाईं मुश्किलें

मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब जेपीएससी नियुक्ति घोटाले के मास्टरमाइंड और किंगपिन अभय कुमार तिवारी ने सीआईडी के सामने अपना इकबालिया बयान दर्ज कराया। अभय तिवारी ने अधिकारियों के समक्ष स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि इस पूरे नेटवर्क और घोटाले में पूर्व चेयरमैन एल ख्यांग्ते की सीधी संलिप्तता थी। उसने अपने बयान में यह भी उजागर किया कि परीक्षा आयोजित करने वाली कंपनी के तौर पर TDPL का चयन कराने में ख्यांग्ते ने मुख्य भूमिका निभाई थी। अब सबकी नजरें हाईकोर्ट पर टिकी हैं कि क्या पूर्व मुख्य सचिव को जमानत पर रिहाई मिलती है या उनकी न्यायिक हिरासत आगे भी जारी रहेगी।

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