
Jharkhand High Court: हजारीबाग के विनोबा भावे विश्वविद्यालय से जुड़े यूनिवर्सिटी लॉ कॉलेज के गलियारों में पिछले कुछ समय से एक नाम को लेकर काफी चर्चा चल रही थी। यह नाम है असिस्टेंट प्रोफेसर लक्ष्मी सिंह का, जिनकी शैक्षणिक योग्यता पर उठ रहे सवाल अब सीधे अदालत के दरवाजे तक पहुंच गए हैं। लंबे समय से चल रहे इस विवाद में अब झारखंड हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए लक्ष्मी सिंह को नोटिस जारी किया है और उनसे जवाब मांगा है।

सर्टिफिकेट में अलग नाम होने का लगा आरोप
हाई कोर्ट में दायर याचिका में लक्ष्मी सिंह की शैक्षणिक योग्यताओं को सीधे तौर पर चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि उनके अलग-अलग शैक्षणिक कागजातों और प्रमाण पत्रों में नाम अलग-अलग लिखे हुए हैं। इन्हीं गड़बड़ियों को आधार बनाते हुए अदालत से उनके शैक्षणिक प्रमाण पत्रों को रद्द करने की मांग की गई है। न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई, जिसके बाद प्रोफेसर को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस भेजा गया है।

बार काउंसिल की शिकायत और जांच समिति का पेंच
लक्ष्मी सिंह की डिग्री का यह विवाद कोई नया नहीं है। इससे पहले बार काउंसिल ऑफ इंडिया के पास भी इस सिलसिले में शिकायत पहुंची थी। काउंसिल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से जांच कर रिपोर्ट भेजने को कहा था। इसके बाद विश्वविद्यालय ने एक जांच कमेटी का गठन भी किया, लेकिन यह कमेटी काफी समय बीत जाने के बाद भी अपनी रिपोर्ट तैयार नहीं कर सकी।
वेतन रुका, फिर दूसरी कमेटी की रिपोर्ट पर मिली राहत
जांच लटकने के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक वक्त लक्ष्मी सिंह का वेतन रोक दिया था। बाद में मामले को सुलझाने के लिए एक दूसरी जांच कमेटी बनाई गई। इस नई कमेटी की सिफारिशों के आधार पर ही उनके कॉन्ट्रैक्ट को रिन्यू किया गया और उन्हें काम जारी रखने की इजाजत मिली। हालांकि इसमें एक शर्त यह भी रखी गई है कि अगर पहली जांच कमेटी की रिपोर्ट उनके खिलाफ आती है, तो उनकी सेवा समाप्त कर दी जाएगी। फिलहाल हाई कोर्ट के इस नोटिस के बाद मामले में नया मोड़ आ गया है।


