
Ranchi: JPSC-JSSC की परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब CID की जांच रिपोर्ट को लेकर सियासत तेज हो गई है। झारखंड हाईकोर्ट में राज्य सरकार की ओर से CID की स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश किए जाने पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि रिपोर्ट बंद लिफाफे में ही क्यों दी जा रही है और इसमें देरी की वजह क्या है। हाईकोर्ट ने सरकार को 48 घंटे के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

क्या सरकार पारदर्शिता से डर रही है?
बाबूलाल मरांडी ने सवाल उठाते हुए कहा कि CID की रिपोर्ट चार सप्ताह बाद कोर्ट में पेश की गई और वह भी सीलबंद लिफाफे में। उन्होंने कहा कि यह अच्छी बात है कि अदालत ने सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए 48 घंटे का समय दिया है।

उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार पारदर्शिता से बचना चाहती है और क्या 22 प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले के पीछे ऐसी कोई जानकारी है, जिसे सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहती। हालांकि ये सवाल और आरोप बाबूलाल मरांडी के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं।
‘मामला सिर्फ परीक्षा रद्द होने तक सीमित नहीं’
भाजपा नेता ने कहा कि असली सवाल सिर्फ परीक्षाओं को रद्द करने का नहीं है। यह पता लगाना जरूरी है कि परीक्षाओं में गड़बड़ी कैसे हुई, इसके लिए जिम्मेदार कौन लोग हैं और उन लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य का क्या होगा, जिन्होंने इन परीक्षाओं की तैयारी में कई साल लगाए हैं।
दरअसल, राज्य सरकार ने अगस्त में JPSC और JSSC से जुड़ी 22 प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था, जबकि कई अन्य परीक्षाओं को स्थगित करने और कुछ की जांच कराने का निर्णय भी लिया गया था। बाद में हाईकोर्ट ने परीक्षा और नियुक्तियां रद्द करने के सरकार के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी।
JSSC-CGL मामले का भी उठाया जिक्र
बाबूलाल मरांडी ने JSSC-CGL मामले का जिक्र करते हुए पिछली CID जांच पर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक, परीक्षा से पहले नेपाल, बिहार और बंगाल में 135 सवालों के लीक होने की जानकारी सामने आई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि CID ने मामले को सिर्फ ठगी तक सीमित बताया और हाईकोर्ट को सही जानकारी नहीं दी।
इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगा। फिलहाल हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई जारी है।
‘CBI जांच जरूरी’
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि JPSC-JSSC की 22 परीक्षाओं को लेकर झारखंड के लाखों युवाओं के मन में सवाल हैं। उन्होंने कहा कि कोर्ट को जवाब सीलबंद लिफाफे में दिया जा सकता है, लेकिन अभ्यर्थियों के सवालों को इस तरह बंद नहीं किया जा सकता।
उन्होंने पूरे मामले की CBI जांच की मांग दोहराते हुए कहा कि युवाओं को न्याय दिलाने के लिए मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच जरूरी है।


