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142 में से 93 गोल्ड मेडल पर कब्जा!, रांची के DSPMU दीक्षांत समारोह में बेटियों ने लहराया परचम

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Ranchi: विश्वविद्यालय की दहलीज पार कर जब कोई युवा अपनी डिग्री हाथ में थामता है, तो वह महज एक कागज नहीं होता, बल्कि सालों की कड़ी मेहनत, माता पिता के त्याग और भविष्य के सपनों की नई शुरुआत होती है। राजधानी रांची स्थित डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) का दीक्षांत मंडप आज ऐसे ही हजारों नौजवानों के खिलखिलाते चेहरों और गौरव भरे पलों का गवाह बना। विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह में जब यूजी, पीजी और शोध के कुल 6,415 छात्र छात्राओं को डिग्रियां सौंपी गईं, तो पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इस पूरे आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि सफलता की दौड़ में बेटियों ने एक बार फिर अपना दबदबा साबित किया। कुल 142 गोल्ड मेडल में से 93 मेडल अकेले छात्राओं की झोली में गिरे, जिसे देखकर मुख्य अतिथि और राज्यपाल संतोष कुमार गांगवार भी उनकी तारीफ किए बिना नहीं रह सके।

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मेडल की रेस में बेटियों ने मारी बाजी, संकाय टॉपर्स को मिला सम्मान

समारोह की शुरुआत राष्ट्रगान, कुलगीत और दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसके बाद राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की नई वेबसाइट का भी उद्घाटन किया। इस दीक्षांत समारोह के लिए 3,535 छात्र छात्राओं ने बाकायदा पंजीकरण कराया था, जबकि कुल 6,415 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें 3,350 छात्राएं और 3,065 छात्र शामिल रहे, साथ ही 20 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि दी गई। बेहतर प्रदर्शन के लिए विभिन्न संकायों के होनहारों को मंच पर सम्मानित किया गया। पीजी स्तर पर नेहा गोरुंग, प्रेम ठाकुर, शुभम कुमार पांडेय, एकता कुमारी, विभा रानी, सिमरन कुमारी, आयुष राज, सौम्या कुमारी आर्या, सूर्या कुमारी, आयुषी कुमारी और जन्नत नूर ने अपने अपने विषयों में अव्वल आकर गोल्ड मेडल जीता। वहीं यूजी स्तर पर लवली कुमारी, प्रिया कुमारी, तनु कुमारी सिंह, शुभकामना सिंह और अमृता कुमारी तिवारी ने गोल्ड मेडल हासिल कर अपने माता पिता और शिक्षकों का नाम रोशन किया।

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तकनीक इंसान के लिए है इंसान तकनीक के लिए नहीं

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल संतोष कुमार गांगवार ने कहा कि आज बेटियां हर क्षेत्र में अपनी काबिलियत का लोहा मनवा रही हैं और 142 में से 93 गोल्ड मेडल जीतना बदलते भारत की जीती जागती मिसाल है। प्राचीन नालंदा महाविहार की परंपरा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ज्ञान सिर्फ जानकारियां जुटाना नहीं, बल्कि सवाल पूछने और सच को खोजने की आदत है। आधुनिक दौर की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल क्रांति पर चर्चा करते हुए उन्होंने चेताया कि तकनीक को इंसान ने गढ़ा है, इंसान को तकनीक ने नहीं बनाया। इसलिए तकनीक का इस्तेमाल समाज की भलाई और मानवीय संवेदनाओं के साथ होना चाहिए। राज्यपाल ने युवाओं से कहा कि वे सिर्फ नौकरी खोजने वाले न बनें, बल्कि ऐसे रास्ते चुनें जिससे वे दूसरों को भी रोजगार दे सकें। उन्होंने जीवन में कभी असफल होने पर निराश न होने और धैर्य के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी।

ज्ञान के साथ चरित्र और विनम्रता जरूरी, कुलपति ने गिनाईं उपलब्धियां

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ राजीव मनोहर ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि कॉलेज अब तक आपके सामने सवाल रखता था और आप जवाब देते थे, लेकिन अब जिंदगी सवाल पूछेगी और आपके फैसले ही उसके सही जवाब तय करेंगे। उन्होंने कहा कि ज्ञान इंसान को काबिल बनाता है, लेकिन उसका सही रास्ता चरित्र तय करता है। कुलपति ने जानकारी दी कि शिक्षकों और कर्मचारियों की मेहनत से हाल ही में करीब आठ सेमेस्टर परीक्षाएं समय पर पूरी कराई गईं और 2024 सत्र का रिजल्ट महज 10 दिनों के भीतर जारी कर नया रिकॉर्ड बनाया गया। इसके अलावा शिक्षकों के 344 से ज्यादा शोध पत्र और 50 से अधिक किताबें प्रकाशित हुई हैं। शोध को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय में पुण्य और उत्कृष्ट जैसी योजनाएं भी शुरू की गई हैं।

सीखने का सफर कभी खत्म नहीं होता

समारोह के विशिष्ट अतिथि और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य डॉ राकेश मोहन को मानद उपाधि से नवाजा गया। विद्यार्थियों को अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से की थी, लेकिन बाद में वे कानून और अर्थशास्त्र की तरफ मुड़े और मौद्रिक नीति के बड़े पदों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि कॉलेज आपको सोचने और समझने की बुनियादी ताकत देता है। इसलिए जिंदगी में सीखने का सिलसिला कभी रुकना नहीं चाहिए और डिग्री मिलने के बाद अब हर विद्यार्थी खुद अपना सबसे बड़ा शिक्षक है।

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