
विक्रमशिला सेतु बंद होने से बढ़ी आवाजाही की परेशानी और त्योहारी सीजन में यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए पूर्वी रेलवे ने भागलपुर और कटिहार के बीच अनारक्षित स्पेशल ट्रेन चलाने का फैसला किया है। रेलवे की इस पहल से दैनिक यात्रियों के साथ त्योहार के दौरान सफर करने वाले लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।

7 अक्टूबर से शुरू होगी ट्रेन
पूर्वी रेलवे के अनुसार, गाड़ी संख्या 03409 भागलपुर-कटिहार स्पेशल 7 अक्टूबर 2026 से 30 नवंबर 2026 तक चलेगी। यह ट्रेन रोजाना शाम 5:30 बजे भागलपुर से रवाना होकर रात 11:10 बजे कटिहार पहुंचेगी।

वापसी में गाड़ी संख्या 03410 कटिहार-भागलपुर स्पेशल 8 अक्टूबर से 1 दिसंबर 2026 तक चलेगी। यह ट्रेन रोजाना सुबह 6:35 बजे कटिहार से खुलेगी और दोपहर 12:05 बजे भागलपुर पहुंचेगी।
इन स्टेशनों पर होगा ठहराव
दोनों दिशाओं में चलने वाली यह स्पेशल ट्रेन अकबरनगर, सुल्तानगंज, कल्याणपुर रोड, बरियारपुर, रतनपुर और मुंगेर स्टेशनों पर रुकेगी। इन स्टेशनों पर ठहराव से भागलपुर और कटिहार के अलावा बीच के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के यात्रियों को भी आवागमन में सुविधा मिलेगी।
इस ट्रेन की खासियत यह है कि इसमें आरक्षण की जरूरत नहीं होगी। त्योहारों के दौरान नियमित ट्रेनों में कन्फर्म टिकट मिलना मुश्किल होने के बीच अनारक्षित स्पेशल ट्रेन यात्रियों के लिए अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराएगी। दैनिक यात्री, मजदूर, छोटे कारोबारी और अचानक यात्रा करने वाले लोग टिकट लेकर इस ट्रेन से सफर कर सकेंगे।
विक्रमशिला सेतु बंद होने से बढ़ी थी परेशानी
भागलपुर को नवगछिया और उत्तर बिहार के कई जिलों से जोड़ने वाला विक्रमशिला सेतु महत्वपूर्ण मार्ग है। सेतु के बंद होने से सड़क मार्ग पर वाहनों का दबाव बढ़ा और कई जगहों पर जाम की स्थिति बनी।
नौकरी, कारोबार, इलाज और खरीदारी के लिए रोजाना आवागमन करने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। त्योहारी सीजन में भीड़ बढ़ने के कारण समस्या और गंभीर होने की आशंका थी।
ऐसे में रेलवे की यह अतिरिक्त सेवा यात्रियों के लिए वैकल्पिक परिवहन का माध्यम उपलब्ध कराएगी।
दो महीने तक मिलेगी अतिरिक्त रेल सेवा
भागलपुर-कटिहार स्पेशल ट्रेन करीब दो महीने तक यात्रियों को अतिरिक्त सेवा देगी। फिलहाल यह सेवा 30 नवंबर और 1 दिसंबर 2026 तक निर्धारित है। आगे सड़क मार्ग की स्थिति और यात्रियों की जरूरत को देखते हुए सेवा की अवधि बढ़ाने का फैसला रेलवे की ओर से लिया जा सकता है।


