
बिहार में विधानमंडल की समितियों की बैठकों में अधिकारियों की गैरहाजिरी को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी विभागों के सचिवों को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि अधिकारी समितियों की बैठकों को गंभीरता से लें और निर्धारित समय पर उपस्थित रहें। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि बिना उचित कारण बैठक से अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

बैठक में नहीं पहुंचे तो होगी कार्रवाई
मुख्य सचिव की ओर से जारी निर्देश के मुताबिक, विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को विधानमंडल की समितियों की बैठकों में उपस्थित रहना होगा। यदि कोई अधिकारी किसी कारण से बैठक में शामिल नहीं हो सकता है, तो उसे कम से कम सात दिन पहले इसकी सूचना देनी होगी।

ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारी अपनी जगह किसी दूसरे योग्य अधिकारी को भेज सकता है। हालांकि, प्रतिनिधि अधिकारी को बैठक में चर्चा के लिए निर्धारित विषय की पूरी जानकारी होनी चाहिए, ताकि सवालों का सही जवाब दिया जा सके और संबंधित मामलों पर जरूरी निर्णय लिए जा सकें।
अपर मुख्य सचिव से लेकर डीएम तक के लिए निर्देश
यह निर्देश राज्य के कई स्तरों के वरिष्ठ अधिकारियों पर लागू होगा। इनमें विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव, प्रमंडलीय आयुक्त और जिलाधिकारियों सहित अन्य संबंधित अधिकारी शामिल हैं।
बताया जा रहा है कि विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने विधानमंडल की समितियों की बैठकों में अधिकारियों के अनुपस्थित रहने को लेकर लगातार आपत्ति जताई थी। इसके बाद मुख्य सचिव की ओर से अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए यह निर्देश जारी किया गया।
बिना जानकारी वाले अधिकारियों को भेजने पर भी नाराजगी
बैठकों में अधिकारियों की गैरहाजिरी के अलावा एक दूसरी समस्या भी सामने आई है। शिकायतों के मुताबिक, कुछ अधिकारी अपनी जगह ऐसे प्रतिनिधियों को भेज देते हैं, जिन्हें संबंधित विषयों की पर्याप्त जानकारी नहीं होती। इससे समिति के सवालों के जवाब देने और मामलों की समीक्षा करने में परेशानी होती है।
बोर्ड और निगमों के प्रबंध निदेशक स्तर के अधिकारियों की अनुपस्थिति को लेकर भी शिकायतें सामने आने की बात कही गई है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों को बैठकों में जिम्मेदारी के साथ उपस्थित रहने और विषय से जुड़ी पूरी जानकारी लेकर आने के निर्देश दिए गए हैं।
लंबित मामलों का समय पर निपटारा करने का आदेश
संसदीय कार्य विभाग की ओर से भी लंबित मामलों के निपटारे को लेकर निर्देश जारी किए गए हैं। अधिकारियों को कहा गया है कि वे मामलों को निर्धारित समय सीमा के भीतर निपटाने की दिशा में काम करें।
शिकायत रही है कि कई विभाग लंबित मामलों के समाधान में अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाते। नए निर्देशों के तहत अधिकारियों को अगली बैठकों में संबंधित दस्तावेजों, अद्यतन विवरण और कार्रवाई की स्थिति के साथ उपस्थित होना होगा। साथ ही, लंबित मामलों के समाधान के लिए ठोस पहल करनी होगी।
अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की तैयारी
सरकार के इन निर्देशों का उद्देश्य विधानमंडल की समितियों की कार्यवाही को प्रभावी बनाना और विभागीय जवाबदेही बढ़ाना है। अब अधिकारियों की उपस्थिति के साथ-साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि वे संबंधित मामलों पर कितनी तैयारी के साथ आते हैं और लंबित शिकायतों के समाधान में क्या प्रगति होती है।


