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जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के नियम सख्त, अब देरी होने पर SDO और न्यायिक जांच जरूरी

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सीतामढ़ी: बच्चे के जन्म या किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद प्रमाणपत्र बनवाने में देरी करना अब लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। जन्म और मृत्यु के विलंबित पंजीकरण की प्रक्रिया को लेकर नए नियमों के तहत अलग-अलग समय सीमा के अनुसार मंजूरी की व्यवस्था की गई है। अब घटना के एक से दो साल बाद प्रमाणपत्र बनवाने के लिए अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) स्तर से मंजूरी जरूरी होगी, जबकि दो साल से अधिक पुराने मामलों में न्यायिक जांच और आदेश की आवश्यकता होगी।

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जिला सांख्यिकी पदाधिकारी (DSO) शंभू मांझी के अनुसार, जन्म या मृत्यु की घटना के एक वर्ष के भीतर पंजीकरण कराने की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, निर्धारित समय सीमा के बाद आवेदन करने वाले लोगों को संबंधित अधिकारियों से मंजूरी लेनी होगी।

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एक साल के भीतर आवेदन करने पर पुरानी प्रक्रिया लागू

जिला सांख्यिकी पदाधिकारी शंभू मांझी ने बताया कि जन्म या मृत्यु की घटना के एक वर्ष के भीतर आवेदन करने वाले मामलों में पहले की प्रक्रिया ही लागू रहेगी। ऐसे प्रमाणपत्र सामान्य प्रक्रिया के तहत बनाए जा सकेंगे।

हालांकि, एक वर्ष की समय सीमा बीत जाने के बाद विलंबित पंजीकरण के लिए अलग प्रक्रिया अपनानी होगी। इसलिए लोगों को जन्म या मृत्यु की घटना के बाद समय रहते पंजीकरण कराने की सलाह दी जाती है।

एक से दो साल पुराने मामलों में SDO जारी करेंगे प्रमाणपत्र

पहले एक से दो वर्ष पुराने मामलों में ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत सचिव और शहरी क्षेत्रों में नगर निकायों के कार्यपालक पदाधिकारी जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कर सकते थे।

लेकिन नए नियमों के तहत इस अवधि के मामलों में प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) के स्तर पर निर्धारित किया गया है। यानी यदि जन्म या मृत्यु की घटना को एक से दो साल हो चुके हैं, तो संबंधित व्यक्ति को SDO स्तर पर निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

दो साल से अधिक पुराने मामलों में न्यायिक जांच जरूरी

यदि जन्म या मृत्यु की घटना को दो साल से अधिक समय बीत चुका है और अब तक उसका पंजीकरण नहीं हुआ है, तो प्रक्रिया और अधिक विस्तृत होगी। DSO शंभू मांझी के अनुसार, ऐसे मामलों में प्रथम श्रेणी के न्यायिक दंडाधिकारी के स्तर पर संबंधित घटना की जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट और आदेश मिलने के बाद ही ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत सचिव तथा शहरी क्षेत्रों में नगर निकाय के संबंधित पदाधिकारी प्रमाणपत्र जारी कर सकेंगे। इस व्यवस्था के तहत पुराने मामलों में जन्म या मृत्यु से संबंधित जानकारी की पुष्टि और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होगा।

जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने में देरी से बचें

जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र कई सरकारी और कानूनी कार्यों में महत्वपूर्ण दस्तावेज होते हैं। समय पर पंजीकरण नहीं होने पर बाद में अतिरिक्त प्रक्रिया और मंजूरी की जरूरत पड़ सकती है।

इसलिए अभिभावकों और संबंधित परिवारों के लिए जरूरी है कि वे जन्म या मृत्यु की घटना के बाद जल्द से जल्द पंजीकरण कराएं। यदि पंजीकरण में पहले ही देरी हो चुकी है, तो आवेदन करने से पहले संबंधित स्थानीय निकाय, पंचायत सचिवालय या अनुमंडल कार्यालय से लागू प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी ले लें।

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