
Digital Desk Naxatra Samachar: ‘बुला लो जिसको बुलाना है… यहीं बैठकर हिसाब करेंगे! मीडिया को लगता है न मेरा कुछ बिगाड़ लेगा, तो हम भी देखते हैं मीडिया वालों को… बुला लो जितने मीडिया वाले हैं!’ किसी सामान्य विवाद में यह किसी दबंग की जुबान लग सकती है, लेकिन यह तल्खी और खुली चुनौती कथित तौर पर राज्य पुलिस के एक वरिष्ठ IPS अधिकारी और रेल DIG की जुबान से निकली है। राजधानी रांची के पॉश इलाके अशोक नगर में वर्षों पुराने आम रास्ते को लेकर शुरू हुआ टकराव अब प्रशासनिक हदों को पार कर सीधे संवैधानिक और सियासी गलियारों में गूंजने लगा है। पत्रकार सैयद शरीफ इब्राहिम द्वारा मुख्यमंत्री को दी गई लिखित शिकायत के बाद अब उस तल्ख बातचीत और कथित बयानों ने विवाद को और हवा दे दी है, जिसमें मीडिया को ललकारने से लेकर वर्दी के पावर का खुला प्रदर्शन साफ सुनाई दे रहा है।

‘ना हम SP बनने आए हैं, ना DIG… हम ऐसे-वैसे IPS नहीं हैं’
विवाद के दौरान सामने आए तीखे बयानों में IPS अधिकारी का यह कहना कि “ना हम यहां एसपी बनने आए हैं, ना DIG बनने आए हैं… हम ऐसे-वैसे IPS ऑफिसर नहीं हैं! बाकी की तरह आईपीएस न समझें ये लोग हमें…” सीधे तौर पर उस प्रशासनिक हनक को दर्शाता है, जिसे लेकर शिकायतकर्ता ने सुरक्षा की गुहार लगाई है। सवाल यह उठ रहा है कि कानून और संविधान की शपथ लेने वाला एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी किसके खिलाफ और किस अधिकार से ऐसे ‘पावर’ की बात कर रहा है? क्या कानून व्यवस्था की रक्षा के लिए मिली वर्दी और ताकत का इस्तेमाल आम नागरिकों और पड़ोसियों के बुनियादी हकों को दबाने के लिए किया जाएगा?

5 दशकों से इस्तेमाल हो रहा रास्ता और 5 परिवारों का हक
पूरे विवाद की जड़ अशोक नगर रोड नंबर-1 स्थित एक पहुंच मार्ग है। मुख्यमंत्री को दिए गए आवेदन के अनुसार, पत्रकार सैयद शरीफ इब्राहिम का परिवार करीब पांच दशक (लगभग 50 साल) से इस जमीन पर रह रहा है। उनके पिता और चाचाओं ने सक्षम प्राधिकार से स्वीकृत नक्शे के आधार पर अपने मकान बनाए थे। दस्तावेजों और नक्शों में अशोक नगर सोसाइटी की तरफ से 40 फीट चौड़ा रास्ता साफ तौर पर दर्ज है, जिसका इस्तेमाल पांच परिवार कई पीढ़ियों से बिना किसी विवाद के अपने घरों तक आने-जाने के लिए करते आ रहे हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि जब से रेल DIG आलोक प्रियदर्शी उनके परिसर के ठीक बगल में शिफ्ट हुए हैं, तब से इस सार्वजनिक पहुंच मार्ग के इस्तेमाल पर लगातार अड़ंगा लगाया जा रहा है।
सरकारी गाड़ी से रास्ता रोकने और झूठे केस में फंसाने का आरोप
मुख्यमंत्री को सौंपी गई शिकायत में बेहद गंभीर आरोप दर्ज हैं। पत्रकार का कहना है कि बीते दिनों DIG की सरकारी गाड़ी को उनके मुख्य गेट के ठीक सामने आड़ा-तिरछा खड़ा कर दिया गया, जिससे घर के लोगों का निकलना दूभर हो गया। जब इस मनमानी का विरोध किया गया, तो सुरक्षाकर्मियों के साथ आकर न केवल धमकाया गया, बल्कि परिवार के मासूम बच्चों तक को झूठे मामलों में जेल भिजवाने की धमकी दी गई। आरोप यह भी है कि वर्दीधारियों के जरिए डराने-धमकाने के दौरान गोली मारने तक की बात कही गई और धार्मिक पहचान को लेकर बेहद अशोभनीय व आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं।
CM सचिवालय में दर्ज हुई शिकायत, निष्पक्ष जांच की मांग
इस पूरे घटनाक्रम से दहशतजदा पांच परिवारों की सुरक्षा को लेकर पीड़ित पत्रकार ने 29 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री सचिवालय में औपचारिक रूप से लिखित गुहार लगाई है। शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि नगर निकाय और राजस्व विभाग से जमीन के मूल दस्तावेज, स्वीकृत भवन नक्शे और 40 फीट रास्ते के अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, जांच में पूरे साक्ष्य सौंपने की बात कहते हुए उन्होंने अपने परिवार और बच्चों की हिफाजत के लिए तत्काल सरकारी हस्तक्षेप की मांग की है। हालांकि, यह पूरा मामला फिलहाल शिकायतकर्ता के आवेदन और उनके द्वारा उजागर किए गए बयानों पर आधारित है। पूरे विवाद की निष्पक्ष तस्वीर तभी साफ होगी जब संबंधित IPS अधिकारी या पुलिस मुख्यालय की ओर से इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आएगा।


