
Railway Corruption: CBI के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने सोमवार को भ्रष्टाचार के करीब आठ वर्ष पुराने मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने पूर्व-मध्य रेलवे पतरातू के दो तत्कालीन रेल अधिकारियों को दोषी करार देते हुए 3-3 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। सजा पाने वालों में पतरातू के तत्कालीन असिस्टेंट मैटेरियल मैनेजर केके झा और सीनियर DME राजेश्वरी सिंह शामिल हैं। अदालत ने दोनों दोषियों पर 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है, जिसे अदा न करने पर उन्हें तीन-तीन माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

ठेकेदार से बकाया बिल भुगतान के एवज में मांगी थी घूस
अदालत में मामले की पैरवी CBI की ओर से विशेष लोक अभियोजक खुशबू जायसवाल ने की। अभियोजन के अनुसार, रेलवे ठेकेदार नरेश सिंह रेलवे को विभिन्न पार्ट्स की आपूर्ति करते थे। उन्होंने वर्ष 2018 में दोनों अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। ठेकेदार का आरोप था कि उनके बकाये बिलों के भुगतान की मंजूरी देने के बदले दोनों अधिकारियों ने उनसे कुल 62 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी। इसमें से 45 हजार रुपये सीनियर DME राजेश्वरी सिंह और 17 हजार रुपये असिस्टेंट मैटेरियल मैनेजर (AMM ) केके झा को दिए जाने तय हुए थे।

CBI के ट्रैप में रंगेहाथ गिरफ्तार हुए थे दोनों अधिकारी
शिकायत मिलने के बाद सीबीआई की टीम ने मामले का गुप्त सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि हुई। इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाकर दोनों अधिकारियों को रिश्वत की रकम लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया गया था। गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने दोनों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया।
18 गवाहों की गवाही के बाद अदालत ने ठहराया दोषी
मुकदमे के ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपने आरोपों को साबित करने के लिए अदालत में कुल 18 गवाहों के बयान दर्ज कराए। इसके अतिरिक्त सीबीआई द्वारा जब्त की गई रिश्वत की रकम और तकनीकी साक्ष्यों को अदालत के समक्ष पेश किया गया। दोनों पक्षों की अंतिम बहस और पत्रावली पर मौजूद पुख्ता सबूतों के आधार पर अदालत ने दोनों पूर्व अधिकारियों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी पाते हुए सजा सुनाई।


