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जंतर मंतर प्रदर्शन और इंटरनेट बैन मामले में SC से केंद्र ने मांगी बिना शर्त माफी, वापस लेने की अपील

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New Delhi: जंतर मंतर पर प्रदर्शन की परमिशन और इंटरनेट सेवा बंद करने से जुड़े विवाद में केंद्र सरकार ने SC में अपना जवाब दाखिल कर दिया है। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने हलफनामा दाखिल करते हुए शीर्ष अदालत से बिना शर्त माफी मांगी है और स्पष्ट किया है कि SC के किसी भी आदेश का जानबूझकर या सोच-समझकर उल्लंघन नहीं किया गया था। केंद्र ने अदालत से आग्रह किया है कि मामले में जारी अवमानना नोटिस को वापस ले लिया जाए। इसके साथ ही सरकार ने अदालत से 11 अक्टूबर 2026 के आदेश में संशोधन की मांग करते हुए गुहार लगाई है कि बेहद जरूरी और आपात परिस्थितियों में कानूनी सुरक्षा उपायों के तहत इंटरनेट सेवाएं सस्पेंड करने की छूट मिलनी चाहिए।

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शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की अवमानना याचिका पर दिया जवाब, कोर्ट की अवहेलना से इनकार

यह पूरा मामला शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दाखिल अवमानना याचिका के बाद सामने आया, जिसमें SC के 9 अक्टूबर 2026 के आदेश की अवहेलना का आरोप लगाया गया था। गृह सचिव ने अपने जवाब में अदालत को आश्वस्त किया कि तथ्यों को सामने रखने का मकसद सिर्फ यह साफ करना है कि न्यायिक निर्देशों की अनदेखी की कोई मंशा नहीं थी। सरकार ने देश की सभी अदालतों और SC के प्रति पूरा सम्मान जताते हुए कहा कि यह कदम केवल राष्ट्रीय राजधानी में शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया था। सरकार ने अदालत को बताया कि एक संगठन ने जरूरी अनुमति न मिलने के बावजूद प्रदर्शन का ऐलान कर दिया था, जिसके चलते शांति व्यवस्था बिगड़ने का सीधा खतरा पैदा हो गया था।

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रायसीना हिल के 4 किलोमीटर दायरे में ही बंद था नेट, केवल मोबाइल सर्विस पर लगी थी रोक

इंटरनेट निलंबन पर सफाई देते हुए केंद्र ने हलफनामे में बताया कि पाबंदी बेहद सीमित दायरे और तय समय के लिए लगाई गई थी। 9 अक्टूबर 2026 की रात 10 बजे से 10 अक्टूबर की रात 10 बजे तक रायसीना हिल के केवल चार किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट बंद किया गया था। सरकार के मुताबिक दिल्ली पुलिस की मांग पर स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए यह आनुपातिक फैसला लिया गया था। हलफनामे में यह भी साफ किया गया कि ब्रॉडबैंड और वाई-फाई सेवाओं पर कोई रोक नहीं थी, जिससे आम कामकाज पूरी तरह ठप नहीं हुआ था।

SC के आदेश में संशोधन की मांग, आपात स्थिति में मिले इंटरनेट सस्पेंशन का अधिकार

केंद्र सरकार ने SC से 11 अक्टूबर 2026 के आदेश में जरूरी बदलाव करने की अपील की है। सरकार की दलील है कि असाधारण परिस्थितियों और कानून-व्यवस्था के संकट से निपटने के लिए एक सीमित इलाके और निश्चित समय के लिए इंटरनेट सेवाओं को सस्पेंड करना प्रशासनिक व्यवस्था का जरूरी हिस्सा है। हालांकि केंद्र ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई हमेशा तय कानूनी नियमों और वैधानिक सुरक्षा मानकों के तहत ही होगी। ऐसे में केंद्र ने अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई रद्द करने और भविष्य में सुरक्षा के लिहाज से जरूरी कदम उठाने की छूट देने की गुहार लगाई है।

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