
New Delhi: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक के नेताओं द्वारा सुप्रीम कोर्ट की ओर निकाले जाने वाले मार्च से ठीक पहले भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। विपक्ष की ओर से मिलने का समय मांगे जाने पर CJI ने मीडिया से कहा कि उन्हें बैठक के संबंध में पत्र मिला था और उन्होंने रविवार रात ही इसका औपचारिक जवाब भेज दिया था, जिसमें साफ तौर पर उन कारणों का उल्लेख कर दिया गया है कि वे इस तरह निजी या प्रशासनिक तौर पर क्यों नहीं मिल सकते।

अदालत के दरवाजे खुले हैं, न्यायिक प्रक्रिया से आएं
मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे देश के हर नागरिक के लिए खुले हैं। उन्होंने कहा कि चाहे कोई आम नागरिक हो या किसी निर्वाचित सदन का जनप्रतिनिधि, हर किसी को अदालत में याचिका दाखिल करने का पूरा संवैधानिक अधिकार है। यदि कोई पक्ष कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत का दरवाजा खटखटाता है, तो उनकी चिंताओं और मुद्दों को सुना जाएगा और कानून के दायरे में जो भी उचित होगा, अदालत उस पर विचार करेगी।
Chief Justice of India (#CJI) Justice Suryakant says the doors of the Supreme Court are open to everyone and any petition from any common citizen or member of an elected body is welcome. https://t.co/Ot3ilumg0u
— All India Radio News (@airnewsalerts) October 12, 2026

हितों के टकराव और विचाराधीन मामलों की दलील
‘वन नेशन वन इलेक्शन’ पर जेपीसी (JPC) के दौरे के रद्द होने के संदर्भ में भी CJI ने न्यायपालिका की शुचिता का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि उस विषय में कोर्ट के भीतर हितों के टकराव (Conflict of Interest) की स्थिति बन सकती थी, इसलिए वरिष्ठ न्यायिक सहयोगियों के साथ चर्चा के बाद ऐसी बैठकों से बचने का सामूहिक निर्णय लिया गया। सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी और विपक्ष के मुद्दे भी पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन (sub-judice) हैं, ऐसे में मुख्य न्यायाधीश का किसी राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल से अलग से मिलकर ज्ञापन लेना न्यायिक परंपरा के अनुकूल नहीं माना गया।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR पर ज्ञापन की तैयारी
इससे पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने CJI को पत्र लिखकर सोमवार शाम चार से पांच बजे के बीच मुलाकात का वक्त मांगा था। विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को तुरंत रोकने, कथित ‘वोट चोरी’ पर रोक लगाने और मतपत्र (बैलट पेपर) प्रणाली को बहाल करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपना चाहते थे। कराना है।


