
Chaibasa: पश्चिमी सिंहभूम जिले के पशुपालन विभाग में काम करने वाले तृतीय और चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों में बकाया वेतन को लेकर नाराजगी खुलकर सामने आ गई है। झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ (चाईबासा जिला शाखा) ने रुके हुए वेतन के भुगतान की मांग को लेकर विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महासंघ ने कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के सचिव (रांची), पशुपालन निदेशालय के निदेशक और जिले के पशुपालन पदाधिकारी को एक औपचारिक मांग-पत्र सौंपकर तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है।

वेतन रुकने से बिगड़ी आर्थिक स्थिति, प्रमोशन भी अटका
कर्मचारियों का कहना है कि महीनों से वेतन नहीं मिलने के कारण उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है और रोजमर्रा के खर्चे चलाना मुश्किल हो रहा है। सिर्फ सैलरी रुकना ही नहीं, बल्कि स्वीकृत पदों को धीरे-धीरे खत्म करने और नियमों के मुताबिक मिलने वाली पदोन्नति (प्रमोशन) से वंचित रखने को लेकर भी कर्मियों में असंतोष है। कर्मचारियों का आरोप है कि सेवा से जुड़े उनके वाजिब हक लगातार छीने जा रहे हैं।

डॉक्टरों पर मेहरबानी, कर्मचारियों से भेदभाव का आरोप
महासंघ ने विभाग की कार्यशैली पर दोहरा मापदंड अपनाने का गंभीर आरोप लगाया है। कर्मचारियों का कहना है कि जहां निचले स्तर के स्टाफ को वेतन तक के लिए तरसाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ पशु चिकित्सकों को नियमों की अनदेखी कर प्रमोशन और बेहतर पे-स्केल का लाभ दिया जा रहा है। इतना ही नहीं, रिटायर्ड डॉक्टरों को कॉन्ट्रैक्ट पर रखकर भारी-भरकम भुगतान किया जा रहा है, जबकि फील्ड में काम करने वाले ग्राउंड स्टाफ की उपेक्षा हो रही है।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो सड़क पर उतरने की चेतावनी
कर्मचारी संघ ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द उनके रुके हुए वेतन का भुगतान नहीं किया गया और अन्य विभागीय समस्याओं का समाधान नहीं निकला, तो वे कामकाज ठप कर व्यापक आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि इस गतिरोध से विभाग के कामकाज पर जो भी असर पड़ेगा, उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों और शासन की होगी।


