
Ranchi: राजधानी रांची में फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (FJCCI) के हाल ही में संपन्न हुए चुनावों के बाद उठा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। मतदान और मतगणना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब पूरी चुनाव प्रणाली की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। इस बार के नतीजों के बाद उठी विरोध की लहर इतनी तेज हो चुकी है कि पूरी चुनाव प्रक्रिया को रद्द करने या फिर चार विजेता उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित करने की जोरदार मांग उठने लगी है।

P21 टीम के गंभीर आरोप और वायरल वीडियो
चुनावी समर में उतरी P21 टीम की अगुवाई कर रही पूनम आनंद ने चुनाव प्रबंधन में कई बुनियादी और गंभीर कमियों का आरोप लगाया है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो का हवाला देते हुए दावा किया जा रहा है कि पीली टी-शर्ट पहने चार लोग मतदाताओं को प्रभावित करते दिख रहे हैं। P21 टीम का आरोप है कि फुटेज में दिख रहे ये चार लोग चुनाव में जीत हासिल करने वाले प्रत्याशी हैं, जो वोटिंग के दौरान मतदाताओं को अपने साथ ले जाते और उनसे बातचीत करते नजर आ रहे हैं। इसी आधार पर पूनम आनंद ने इन चार विजेताओं की उम्मीदवारी रद्द करने और चार पूर्व अध्यक्षों को कार्यकारिणी में शामिल करने का प्रस्ताव रखा है।

व्यवस्था में खामियां और मतदाताओं पर असर
विरोध दर्ज कराने वाली टीम का कहना है कि मतदान परिसर के भीतर पूर्व अध्यक्षों के बैठने के लिए जो विशेष व्यवस्था की गई थी, उससे चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित हुई। आरोप है कि पूर्व अध्यक्ष बार-बार मतदान कक्ष से बाहर आते थे, मतदाताओं से मिलते थे और फिर वापस अंदर चले जाते थे। इससे मतदाताओं के फैसले को प्रभावित करने की गुंजाइश बनी रही, जिससे चुनावी पारदर्शिता पर सीधा असर पड़ा है। Team P21 के सदस्यों ने इस बाबत चुनाव समिति के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराने की बात कही है।
चुनाव अधिकारी का रुख और बोगस वोटिंग का मामला
एक तरफ जहां आपत्तियों का दौर जारी है, वहीं चुनाव पदाधिकारी पवन शर्मा ने किसी भी तरह की लिखित शिकायत मिलने की बात से साफ इनकार किया है। उनका कहना है कि पूरी चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराई गई है और अभी तक उनके समक्ष कोई आधिकारिक आपत्ति दर्ज नहीं हुई है। दूसरी ओर, रविवार 13 सितंबर को हुए मतदान के बाद व्यवसायी दिलबीर सिंह ने भी बोगस वोटिंग का आरोप लगाते हुए चुनाव समिति को ईमेल भेजा था। मंगलवार को जब वह अपने ईमेल का जवाब मांगने चैंबर भवन पहुंचे, तो उन्हें कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला, जिससे व्यापारियों के बीच असंतोष और गहरा गया है।


