
Ranchi: JPSC और JSSC परीक्षा को लेकर हुए छात्र आंदोलन में आगे रहने वाले कुणाल प्रताप सिंह और चितरंजन सिंह को रांची सिविल कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला जलाने के दौरान सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में दर्ज केस में दोनों को अग्रिम जमानत मिल गई है। इसके अलावा एक युवक के साथ मारपीट के मामले में भी कोर्ट ने दोनों की अग्रिम जमानत मंजूर कर ली है।

अल्बर्ट एक्का चौक पर पुतला दहन को लेकर दर्ज हुआ था केस
JPSC और JSSC परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर रांची में छात्र आंदोलन हुआ था। इसी दौरान अल्बर्ट एक्का चौक पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला जलाया गया था। रांची जिला प्रशासन ने आरोप लगाया था कि प्रदर्शनकारियों ने बिना अनुमति जुलूस निकाला और सरकारी कामकाज में बाधा डाली। इस मामले में कोतवाली थाना में कांड संख्या 183/2026 दर्ज किया गया था। FIR में कुणाल प्रताप सिंह और चितरंजन सिंह को नामजद आरोपी बनाया गया था।

दोनों की अग्रिम जमानत कोर्ट ने की मंजूर
केस दर्ज होने के बाद कुणाल प्रताप सिंह और चितरंजन सिंह ने गिरफ्तारी से राहत पाने के लिए रांची सिविल कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई थी। मामले की सुनवाई अपर न्यायायुक्त-3 की कोर्ट में हुई। दोनों की ओर से अधिवक्ता सूरज किशोर प्रसाद ने कोर्ट में पक्ष रखा। सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोनों की अग्रिम जमानत मंजूर कर ली।
युवक से मारपीट के केस में भी मिली राहत
कुणाल प्रताप सिंह और चितरंजन सिंह के खिलाफ पुतला दहन के दौरान एक मुस्लिम युवक के साथ मारपीट करने का भी आरोप लगा था। इस मामले में रांची के लोअर बाजार थाना में अलग से FIR दर्ज की गई थी। दोनों आरोपियों ने इस केस में भी अग्रिम जमानत के लिए कोर्ट में अर्जी दी थी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने इस मामले में भी दोनों को अग्रिम जमानत दे दी।
दो केस में गिरफ्तारी से राहत
रांची सिविल कोर्ट के फैसले के बाद कुणाल प्रताप सिंह और चितरंजन सिंह को दोनों मामलों में गिरफ्तारी से राहत मिल गई है। हालांकि, अग्रिम जमानत मिलने का मतलब आरोपों से बरी होना नहीं है। दोनों मामलों की कानूनी प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।


