
Palamu: रांची के तिरिल स्थित CRPF कैंप में रविवार को अपनी ही सर्विस राइफल से गोली लगने के कारण जान गंवाने वाले हवलदार भुनेश्वर पाल का पार्थिव शरीर सोमवार को उनके पैतृक आवास हुसैनाबाद लाया गया। तिरंगे में लिपटा शव गांव पहुंचते ही परिजनों में कोहराम मच गया और पूरे इलाके का माहौल बेहद गमगीन हो गया। अंतिम दर्शन के लिए उनके आवास पर ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। CRPF के वरिष्ठ अधिकारियों ने पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ पार्थिव शरीर परिजनों को सौंपा और जवानों ने मातमी धुन के बीच गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने साथी को अंतिम सलामी दी। इसके बाद जपला स्थित सोन नदी मुक्ति धाम में पूरे राजकीय व सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। इस दौरान CRPF के अधिकारी, हुसैनाबाद थाना प्रभारी चंदन कुमार, वार्ड पार्षद राजेंद्र पाल, कई पूर्व सैनिक और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे। दिवंगत हवलदार अपने पीछे पत्नी, तीन संतानों, बुजुर्ग पिता और दादी समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।

परिजनों ने लगाया विभागीय प्रताड़ना का आरोप
एक तरफ जहां परिवार में मातम पसरा है, वहीं दूसरी ओर परिजनों ने इस पूरी घटना को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मृतक हवलदार के परिजनों ने विभागीय प्रताड़ना का सीधा आरोप लगाते हुए पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की गुहार लगाई है। मृतक की बेटी अलका प्रिया और बेटे सचिन पाल का कहना है कि घटना से महज दो दिन पहले उनके पिता ने फोन पर बातचीत के दौरान विभागीय अधिकारियों द्वारा मानसिक रूप से प्रताड़ित और परेशान किए जाने की बात साझा की थी।

मेस प्रभार और निष्पक्ष जांच की मांग
परिजनों के अनुसार हाल ही में भुनेश्वर पाल को कैंप के मेस का प्रभार सौंपा गया था। परिजनों ने विभाग के एक विशिष्ट अधिकारी पर लगातार मानसिक दबाव बनाने का कथित आरोप लगाया है, जिसके चलते वे भारी तनाव के दौर से गुजर रहे थे। हालांकि परिजनों द्वारा लगाए गए इन आरोपों की अभी तक किसी स्वतंत्र स्रोत या प्रशासनिक स्तर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। परिजनों का कहना है कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष तफ्तीश नहीं होगी, तब तक सच सामने नहीं आ पाएगा।


