
Hazaribagh: भारत सरकार के कोयला मंत्रालय द्वारा राजपत्र में प्रस्तावित चट्टी बरियातू दक्षिणी कोयला खनन परियोजना को लेकर हजारीबाग जिले के रैयतों और स्थानीय ग्रामीणों में काफी आक्रोश है। इस प्रस्तावित खनन परियोजना को रद्द कराने की मांग को लेकर प्रभावित क्षेत्र के रैयत और स्थानीय जनप्रतिनिधि लगातार आंदोलन कर रहे हैं और सरकार व प्रशासन को पत्राचार कर रहे हैं।

राजभवन पहुंचकर राज्यपाल से मिला प्रतिनिधिमंडल
परियोजना को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग को लेकर बुधवार को ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल झारखंड लोक भवन (राजभवन) पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर केरेडारी प्रखंड में प्रस्तावित एनटीपीसी की सीबी दक्षिणी कोल परियोजना से होने वाले संभावित जान-माल, पर्यावरण और सामाजिक नुकसान की विस्तार से जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने राज्यपाल को अपनी मांगों का एक ज्ञापन सौंपा।

हजारों रैयतों के विस्थापन और खेती नष्ट होने की जताई आशंका
प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को अवगत कराया कि इस प्रस्तावित कोयला खदान परियोजना के चालू होने से केरेडारी प्रखंड क्षेत्र के हजारों किसान और रैयत पूरी तरह से विस्थापित हो जाएंगे। ग्रामीणों ने बताया कि इस क्षेत्र की जमीन बेहद उपजाऊ और तीन फसलों वाली कृषि भूमि है, जिस पर खदान बनने से इलाके की खेती और आजीविका पर बेहद गंभीर और विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा। विस्थापन और बेघर होने की आशंका से ग्रामीणों में लगातार भय का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जनहित को सर्वोपरि रखते हुए इस खनन प्रस्ताव को तुरंत रद्द किया जाए।
राज्यपाल ने दिया उचित कार्रवाई का भरोसा
रैयतों और ग्रामीणों की समस्याओं को ध्यान से सुनने के बाद राज्यपाल ने मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को समझा। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे इस विषय पर स्वतः संज्ञान लेते हुए माननीय मुख्यमंत्री, झारखंड सरकार और भारत सरकार के कोयला मंत्रालय सहित संबंधित सक्षम अधिकारियों को पत्र भेजकर स्थिति से अवगत कराएंगे और उचित कदम उठाने को कहेंगे।


