
Neveli Company Protest: दुमका जिले के गोपीकांदर प्रखंड क्षेत्र में आदिवासी मूलवासी प्रभावित संघर्ष समिति के बैनर तले नवेली कंपनी के खिलाफ स्थानीय ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। कंपनी प्रबंधन की मनमानी और वादाखिलाफी से नाराज ग्रामीण पिछले कई दिनों से आंदोलन की राह पर हैं। स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब पूर्व निर्धारित वार्ता बैठक में कंपनी का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचा। बातचीत की तय तारीख पर बड़ी संख्या में ग्रामीण आयोजन स्थल पर जुटे थे, लेकिन अधिकारियों के नदारद रहने से लोगों का गुस्सा भड़क उठा।

पारंपरिक हथियारों के साथ प्रदर्शन, कंपनी के वाहनों का चक्का जाम
आंदोलन के तीसरे दिन भी सैकड़ों की संख्या में महिला और पुरुष ग्रामीण पारंपरिक हथियारों तीर-धनुष के साथ डटे रहे। ग्रामीणों ने टमाक और मांदर की थाप पर जोरदार नारेबाजी करते हुए नवेली कंपनी होश में आओ और जनसुनवाई करो नहीं तो जाने के लिए तैयार रहो जैसे नारे लगाए। संघर्ष समिति के अध्यक्ष ने जानकारी दी कि आंदोलन के तहत मधुबन, जंगलटोला और हेट सिलंगी की ओर आने-जाने वाले नवेली कंपनी के सभी वाहनों को रोककर वापस लौटाया जा रहा है। हालांकि आम जनता की सुविधा को देखते हुए अन्य सामान्य वाहनों के आवागमन पर किसी तरह की रोक नहीं लगाई गई है।

बुनियादी सुविधाएं और मुआवजा दिए बिना खनन शुरू करने का आरोप
ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि नवेली उत्तर प्रदेश पावर प्रोजेक्ट लिमिटेड को गोपीकांदर प्रखंड की ओडमो पंचायत में कोल ब्लॉक आवंटित हुआ है। कंपनी ने प्रभावित आदिवासी और पहाड़िया समुदाय के लोगों से किए गए किसी भी वादे को अब तक धरातल पर नहीं उतारा है। न तो प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा और पुनर्वास के लिए मकान दिए गए हैं और न ही क्षेत्र में पेयजल, बिजली, स्कूल तथा अस्पताल जैसी जरूरी नागरिक सुविधाएं बहाल की गई हैं। इन वादों को पूरा किए बिना ही कंपनी ने सीधे कोयला निकालने का काम शुरू कर दिया है।
मनमानी नहीं रुकी तो पूरी तरह ठप होगा खनन कार्य
प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि कंपनी बातचीत से भागकर अपनी शर्तों पर काम थोपना चाहती है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रभावित गांवों के लोग अब पूरी तरह एकजुट हो चुके हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक सभी विस्थापितों और प्रभावितों को उनका हक, मुआवजा और बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल जातीं, तब तक वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और जरूरत पड़ने पर कोल ब्लॉक में खनन का पूरा काम पूरी तरह से ठप कर दिया जाएगा।


