
Giridih : गिरिडीह जिले की देवरी थाना पुलिस को नक्सल विरोधी अभियान में एक बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस टीम ने दो दशकों से अधिक समय से चकमा दे रहे हार्डकोर नक्सली लखी मुर्मू उर्फ लखिया टुडू को शनिवार को धर दबोचा। देवरी थाना प्रभारी श्वेता कुमारी ने इस महत्वपूर्ण गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी नक्सली पिछले 21 वर्षों से फरार चल रहा था। उसके खिलाफ हत्या, रंगदारी और नक्सली हिंसा के कई संगीन मामले दर्ज थे और न्यायालय से गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद विशेष टीम ने यह सटीक कार्रवाई की।

2005 से दर्ज थे हत्या और नक्सली मामले, हो चुकी थी कुर्की-जब्ती
थाना प्रभारी श्वेता कुमारी ने बताया कि पकड़ा गया नक्सली लखी मुर्मू पुलिस रिकॉर्ड में लंबे समय से वांटेड था। वर्ष 2005 से ही उसके खिलाफ गिरिडीह और सीमावर्ती इलाकों में हत्या, विस्फोट और नक्सली वारदातों की लंबी फेहरिस्त दर्ज थी। पुलिस की लगातार दबिश के बावजूद वह गिरफ्तारी से बचता रहा, जिसके बाद अदालत के आदेश पर उसके पैतृक घर की कुर्की-जब्ती तक की कार्रवाई पूर्व में की जा चुकी थी। हाल ही में न्यायालय द्वारा नया वारंट जारी होने के बाद पुलिस ने उसके संभावित ठिकानों पर जाल बिछाना शुरू किया था।

बिहार के जमुई के जंगलों में छिपा था, चकाई के बाघलौटवा से धराया
गोपनीय सूचना और तकनीकी इनपुट के आधार पर देवरी थाना पुलिस ने बिहार पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर पड़ोसी राज्य बिहार के जमुई जिले में दबिश दी। पुलिस टीम ने चकाई थाना क्षेत्र अंतर्गत घने जंगलों से घिरे अति-संवेदनशील बाघलौटवा गांव में सघन घेराबंदी कर लखी मुर्मू को दबोच लिया। इलाका जंगलों और बीहड़ों से घिरा होने के कारण ऑपरेशन काफी चुनौतीपूर्ण था, लेकिन पुलिस ने उसे भागने का कोई मौका नहीं दिया। गिरफ्तारी के बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
जोनल कमांडर ‘चिराग दा’ के दस्ते का रहा था सक्रिय सदस्य
पुलिस हिरासत में हुई गहन पूछताछ के दौरान गिरफ्तार नक्सली ने कई अहम राज उगले। उसने स्वीकार किया कि वह अतीत में भाकपा (माओवादी) के गिरिडीह-जमुई जोनल कमेटी के कुख्यात प्रमुख ‘चिराग दा’ के सक्रिय दस्ते में शामिल था और इलाके में कई बड़ी घटनाओं की योजना व क्रियान्वयन में भागीदार रहा था। हालांकि, उसने दावा किया कि सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव, साथियों के लगातार आत्मसमर्पण और मुठभेड़ों में मारे जाने के खौफ से उसने पिछले कुछ सालों से संगठन से दूरी बना ली थी और छिपकर सामान्य जीवन जीने की कोशिश कर रहा था।


