
Giridih: उत्तराखंड के पवित्र गंगोत्री धाम से कांवड़ में गंगाजल लेकर पैदल यात्रा पर निकले युवा इंजीनियर गुणवंत जोशी झारखंड के गिरिडीह पहुंचे। वे अपनी कॉर्पोरेट इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर देश के अमर बलिदानी सैनिकों की आत्मशांति के उद्देश्य से इस कठिन आध्यात्मिक और राष्ट्रभक्ति पदयात्रा पर निकले हैं। गिरिडीह पहुंचने पर नगर के राजपूत मुहल्ला निवासी बबलू चंद्रवंशी और उनके मित्रों ने उनका भव्य और आत्मीय स्वागत किया। बबलू चंद्रवंशी के परिजनों ने उनके ठहरने और विश्राम की विशेष व्यवस्था की।

शहीद जवानों के त्याग को समर्पित 1500 किलोमीटर का सफर
बातचीत के दौरान गुणवंत जोशी ने अपनी इस अनोखी यात्रा के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि उनकी इस करीब 1500 किलोमीटर की लंबी पदयात्रा का एकमात्र संकल्प देश की रक्षा में प्राण न्योछावर करने वाले वीर जांबाज शहीद सैनिकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करना है। उन्होंने कहा कि आज पूरा भारत सिर्फ और सिर्फ सरहद पर तैनात सैनिकों के असीम त्याग और बलिदान की बदौलत ही सुरक्षित है, इसलिए हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करे।

देवघर और बासुकीनाथ के बाद सोमनाथ में होगा अंतिम जलाभिषेक
गुणवंत जोशी ने बताया कि गंगोत्री से उठाए गए पवित्र गंगाजल से वे सबसे पहले देवघर स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंग बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करेंगे। इसके बाद वे दुमका के प्रसिद्ध बाबा बासुकीनाथ धाम में पूजा-अर्चना और जलाभिषेक करेंगे। उन्होंने बताया कि उनकी इस पदयात्रा का अंतिम पड़ाव गुजरात का प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर होगा, जहां भगवान शिव पर विधिवत जलाभिषेक करने के साथ ही इस आध्यात्मिक संकल्प यात्रा का औपचारिक समापन होगा। गिरिडीह में उनके इस राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत संकल्प की स्थानीय लोग जमकर सराहना कर रहे हैं।


