
Hazaribagh: झारखंड में गंभीर मरीजों की जिंदगी बचाने वाली 108 एंबुलेंस सेवा के कर्मचारियों के आंदोलन पर हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल के मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि जो कर्मचारी दूसरों की सांसें बचाने के लिए दिन-रात दौड़ते हैं, खटारा एंबुलेंस को धक्का मार-मारकर मरीजों तक पहुंचाते हैं और रात के अंधेरे में अपनी जान जोखिम में डालकर काम करते हैं, आज वे ही अपने हक और बकाए वेतन के लिए सड़कों पर आंदोलन करने को मजबूर हैं। यह झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली और संवेदनहीनता का सबसे जीता-जागता प्रमाण है।

होटलों में AI के सेमिनार और धरातल पर एंबुलेंस को तरसती जनता


रंजन चौधरी ने स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता और स्वास्थ्य विभाग पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में स्वास्थ्य मंत्री सिर्फ बड़ी-बड़ी बयानबाजी तक सीमित हैं और जमीनी हकीकत ‘नाम बड़े और दर्शन छोटे’ वाली बनी हुई है। उन्होंने तंज कसा कि एक तरफ सरकार आलीशान फाइव-स्टार होटलों के सभागारों में उन्नत तकनीक और AI आधारित आधुनिक चिकित्सा प्रणाली पर बड़े-बड़े सेमिनार आयोजित कर अपनी पीठ थपथपा रही है, वहीं दूसरी तरफ गांव-देहात से लेकर शहरों तक गरीब मरीजों को वक्त पर एक साधारण एंबुलेंस तक मयस्सर नहीं हो रही है।
त्योहारी सीजन में सड़क पर आंदोलन, सरकार तुरंत निकाले हल

सांसद प्रतिनिधि ने चेताया कि दुर्गा पूजा और आने वाले त्योहारी सीजन में सड़कों पर दुर्घटनाओं और इमरजेंसी स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे नाजुक वक्त में 108 एंबुलेंस कर्मचारियों का काम बंद करने की नौबत आना आम जनता की जिंदगी से खिलवाड़ करने जैसा है। उन्होंने कहा कि त्योहार के मौके पर इन फ्रंटलाइन वॉरियर्स और उनके परिवारों के दर्द को समझना सरकार का पहला फर्ज होना चाहिए। कर्मचारियों के लंबे समय से रुके वेतन, EPF, ESI, ओवरटाइम का भुगतान और सेवा शर्तों से जुड़ी लंबित मांगों को अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
खोखले आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, समयबद्ध कार्रवाई करे सरकार

रंजन चौधरी ने साफ किया कि सांसद मनीष जायसवाल और उनकी टीम इन 108 कर्मियों की तमाम जायज मांगों का खुलकर समर्थन करती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि अब कागजी वादों और गोलमोल आश्वासनों का दौर बंद होना चाहिए और सरकार को सीधे हस्तक्षेप कर समयबद्ध ठोस फैसले लेने चाहिए। संकट के समय जरूरतमंद परिवारों के लिए 108 कर्मी ही उम्मीद की किरण होते हैं, इसलिए उनके अधिकारों की रक्षा करना भी जनसेवा का ही हिस्सा है। उन्होंने राज्य सरकार को आगाह किया कि स्वास्थ्य विभाग तुरंत अपनी जिम्मेदारी समझे, ताकि त्योहारों के दौरान आपातकालीन एंबुलेंस सेवा बिना किसी रुकावट के जारी रह सके।


