
Digital Desk Naxatra: आम आदमी अगर घर से बिना हेलमेट या मुड़ी-तुड़ी नंबर प्लेट लेकर निकल जाए, तो राजधानी की ट्रैफिक पुलिस पलक झपकते ही चालान की रसीद थमा देती है। जेब ढीली होती है और कानून का पाठ भी अलग से पढ़ाया जाता है। लेकिन जब यही कानून लागू कराने वाले खाकी वर्दीधारी खुद सरेआम नियमों को जूते की नोक पर रखने लगें, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला रांची के धुर्वा थाना इलाके से सामने आया है, जहां वीर कुंवर सिंह चौक के पास कुछ कथित पुलिसकर्मियों को बिना हेलमेट बाइक दौड़ाते और गाड़ी की नंबर प्लेट कपड़े से ढककर घूमते देखा गया। इस पूरे नजारे को देखकर सड़क पर चल रहे लोग दंग रह गए और अब शहर भर में यह सवाल गूंज रहा है कि क्या कानून की सारी सख्ती सिर्फ आम जनता की जेब काटने के लिए है?

वीर कुंवर सिंह चौक पर खुला खेल, नंबर प्लेट पर बांधा कपड़ा
प्रत्यक्षदर्शियों और सामने आई जानकारी के मुताबिक, धुर्वा थाना क्षेत्र के वीर कुंवर सिंह चौक के पास एक बाइक तेजी से गुजरी, जिस पर सवार लोगों के पुलिसकर्मी होने का दावा किया जा रहा है। हैरानी की बात यह थी कि बाइक चला रहे और पीछे बैठे शख्स ने सिर पर हेलमेट तक नहीं पहन रखा था। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह देखने को मिली कि बाइक की नंबर प्लेट को बाकायदा एक कपड़े से लपेटकर पूरी तरह छुपा दिया गया था। यानी कोई चाहकर भी गाड़ी का नंबर न पढ़ सके और न ही ट्रैफिक कैमरों में ई-चालान कटने की कोई गुंजाइश रहे।

पहचान छुपाने का यह कैसा जुगाड़, आखिर किस बात का था खौफ?
मोटर व्हीकल एक्ट के तहत गाड़ी की नंबर प्लेट को किसी भी तरह से ढकना, मोड़ना या मिटाना बेहद गंभीर जुर्म माना जाता है ताकि किसी दुर्घटना या अपराध की स्थिति में वाहन की तुरंत पहचान हो सके। लेकिन यहां तो वर्दी का रौब झाड़ने वालों ने अपनी ही गाड़ी का नंबर प्लेट कपड़े में लपेट रखा था। अब लोग पूछ रहे हैं कि अगर कोई गलत काम नहीं किया था, तो आखिर नंबर प्लेट छिपाने का यह शातिराना जुगाड़ क्यों किया गया? क्या पुलिस महकमे से जुड़े लोगों को अपने ही ट्रैफिक कैमरों से बचने के लिए नंबर प्लेट पर पर्दा डालना पड़ रहा है?
जनता पर डंडा और अपनों पर नरमी, दोगले रवैये से फूटा गुस्सा
राजधानी रांची में ट्रैफिक पुलिस आए दिन चौक-चौराहों पर चेकिंग प्वाइंट बनाकर सघन जांच अभियान चलाती है। जरा सी चूक पर भारी-भरकम जुर्माना ठोक दिया जाता है। ऐसे में जब खुद पुलिसकर्मियों पर ही बिना हेलमेट घूमने और नंबर प्लेट से छेड़छाड़ के आरोप लग रहे हैं, तो आम लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक लोग एक ही सवाल पूछ रहे हैं कि क्या वर्दी पहन लेने से किसी को ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाने का खुला लाइसेंस मिल जाता है? क्या ट्रैफिक एसपी और आला अधिकारी इन बाइक सवारों का पता लगाकर वैसा ही चालान काटेंगे, जैसा किसी आम छात्र या नौकरीपेशा नौजवान का काटा जाता है?
ट्रैफिक महकमे की साख दांव पर, निष्पक्ष जांच की उठी मांग
फिलहाल इस मामले में यह आधिकारिक तौर पर साफ नहीं हो सका है कि बाइक पर सवार लोग किस थाने या विंग के जवान थे और नंबर प्लेट पर कपड़ा लपेटने के पीछे उनकी क्या मजबूरी थी। पुलिस के वरीय अधिकारियों की ओर से भी अभी कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन इस घटना ने राजधानी पुलिस के अनुशासन और निष्पक्षता पर बड़ा सवालिया निशान जरूर खड़ा कर दिया है। अब देखना यह है कि ट्रैफिक विभाग अपनी ही साख बचाने के लिए इस मामले की तहकीकात कर कार्रवाई करता है या फिर बाकी मामलों की तरह इस पर भी खाकी की चादर डालकर पर्दा गिरा दिया जाता है।


