
Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने मासूम बच्चों की तस्करी करने और उन्हें भीख मांगने व वेश्यावृत्ति जैसे घिनौने दलदल में धकेलने वाले गिरोह के मुख्य आरोपी पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने मामले के मास्टरमाइंड विरोढ़ी खेरवार उर्फ अनुराग की नियमित जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है।

निचली अदालत के फैसले पर हाईकोर्ट की मुहर
झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस रंगोन मुखोपाध्याय और जस्टिस अरुण कुमार राय की डबल बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने निचली अदालत के उस फैसले को बिल्कुल सही ठहराया, जिसमें आरोपी को जेल में ही रखने और जमानत न देने का आदेश दिया गया था। आपको बता दें कि आरोपी पिछले कई महीनों से लगातार जेल की सलाखों के पीछे बंद है।

वकील ने कहा रिश्तेदार हैं बच्चे, कोर्ट ने नहीं मानी दलील
सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि जिन बच्चों को पुलिस ने बरामद किया है, वे असल में आरोपी के ही रिश्तेदार हैं। उन्होंने आरोपी के लंबे समय से जेल में बंद होने का वास्ता देकर जमानत की गुहार लगाई। लेकिन अपराध की संगीनता को देखते हुए हाईकोर्ट ने इन दलीलों को पूरी तरह से नकार दिया।
गाड़ी और घर से बरामद हुए थे कई मासूम बच्चे
वहीं राज्य सरकार के वकील ने जमानत याचिका का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि आरोपी कोई साधारण अपराधी नहीं है, बल्कि वह बच्चों की तस्करी के रैकेट का मुख्य सरगना है। उसे सिठियो के पास एक गाड़ी से रंगे हाथों पकड़ा गया था, जिसमें से मासूम बच्चों को रेस्क्यू किया गया था। इसके बाद जब रामगढ़ जिले के कोठार स्थित उसके घर पर छापेमारी की गई, तो वहां से भी कई अन्य छोटे बच्चों को बंधक जैसी हालत से छुड़ाया गया था।


