
Ranchi: रांची के डोरंडा थाना पुलिस द्वारा एक नाबालिग बच्चे को अवैध हिरासत में रखे जाने के गंभीर मामले में दायर हेबियस कॉर्पस याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष डोरंडा थाना प्रभारी सशरीर उपस्थित हुए। हालांकि, अदालत के स्पष्ट आदेश के बावजूद वे घटना से जुड़ा सीसीटीवी फुटेज पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहे।

नाबालिग को बालिग बताकर भेजा जुडिशियल रिमांड
याचिकाकर्ता फिरोज अंसारी की ओर से अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया कि पुलिस ने 4 सितंबर को बच्चे को अवैध रूप से हिरासत में लिया था और 8 सितंबर को उसे जुडिशियल रिमांड पर भेज दिया। परिजनों द्वारा बर्थ सर्टिफिकेट दिखाकर बच्चे के नाबालिग होने का सबूत देने के बावजूद पुलिस ने कागजातों में उसकी उम्र 19 साल दर्ज कर दी। पूर्व में जब कोर्ट ने इस पूरी घटना की सीसीटीवी फुटेज मांगी थी, तो थाना प्रभारी ने सीसीटीवी खराब होने का हवाला दिया था।

खराब CCTV पर हाईकोर्ट सख्त, डीजीपी और गृह सचिव तलब
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने रांची शहर की सड़कों, मुख्य चौराहों और थानों में लगे CCTV कैमरों के काम न करने पर गहरी चिंता और नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि राजधानी की सुरक्षा के लिए CCTV का चालू रहना बेहद जरूरी है। इस मामले में ढिलाई को देखते हुए हाईकोर्ट ने 12 अक्टूबर को राज्य के गृह सचिव और डीजीपी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
SSP की रिपोर्ट न मिलने पर जताई नाराजगी
अदालत ने यह भी याद दिलाया कि पूर्व में रांची SSP को शहर के सभी थानों के सीसीटीवी कैमरों की स्थिति की जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया था, लेकिन अब तक इसका कोई स्टेटस नहीं मिला है। इसके साथ ही, हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को पुलिस द्वारा बच्चे को रिमांड पर भेजे जाने के फैसले को नई याचिका दाखिल कर चुनौती देने की छूट दी है।


