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6 महीने से कम सेवा वाले को कैसे बनाया DGP?, सुप्रीम कोर्ट का झारखंड सरकार को 1 हफ्ते का अल्टीमेटम

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New Delhi: झारखंड में पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति से जुड़े नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि ऐसा नियम जिसके तहत रिटायरमेंट के छह महीने से कम की बची सेवा वाले अफसर को भी DGP बनाया जा सकता है, पहली नजर में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक प्रकाश सिंह फैसले में तय कानून से सीधा टकराता दिखता है। अदालत ने झारखंड सरकार को इस विवादास्पद प्रावधान पर फिर से विचार करने के लिए एक हफ्ते की मोहलत दी है। कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि राज्य सरकार अपने नियम में संशोधन नहीं करती है, तो उसे खुली अदालत में यह साबित करना होगा कि यह नियम शीर्ष अदालत के दिशा-निर्देशों के खिलाफ कैसे नहीं है।

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मौजूदा DGP तदाशा मिश्रा को जारी हुआ नोटिस

अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड की मौजूदा DGP तदाशा मिश्रा को भी औपचारिक नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट का मानना है कि यदि छह महीने से कम सेवा वाले अधिकारियों की नियुक्ति की छूट देने वाले राज्य के नियम को असंवैधानिक करार देकर रद्द किया जाता है, तो इसका सीधा असर मौजूदा DGP की कुर्सी और उनके पूरे कार्यकाल पर पड़ेगा। इसी संभावित असर को ध्यान में रखते हुए अदालत ने उन्हें अपना कानूनी पक्ष रखने का मौका दिया है, जिससे यह पूरा मामला सिर्फ नियमों की बहस तक सीमित न रहकर सीधे राज्य पुलिस प्रमुख के पद से जुड़ गया है।

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सत्ता किसी की भी हो, कानून कमजोर नहीं होगा

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि केंद्र या राज्य में किसकी सरकार है। उन्होंने दो टूक कहा कि सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक जिम्मेदारी यह पक्की करना है कि शीर्ष अदालत द्वारा तय की गई कानूनी व्यवस्था को किसी भी सूरत में कमजोर, निष्प्रभावी या नजरअंदाज न किया जाए। अदालत ने साफ संदेश दिया कि पुलिस सुधारों को लेकर तय गाइडलाइंस को राज्य सरकारें अपनी सुविधानुसार दरकिनार नहीं कर सकतीं।

दूसरे राज्यों के नियमों का भी होगा अध्ययन

कोर्ट ने इस मामले में नियुक्त एमिकस क्यूरी को निर्देश दिया है कि वे केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि देश के अन्य राज्यों में DGP नियुक्ति से जुड़े मौजूदा नियमों और प्रक्रियाओं का भी विस्तृत अध्ययन करें। अदालत यह देखना चाहती है कि बाकी राज्यों में पुलिस प्रमुख के चयन के प्रावधान सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह फैसले के अनुकूल हैं या वहां भी नियमों को मनमाने ढंग से बदला गया है। सभी पक्षों की दलीलें और रिपोर्ट आने के बाद ही इस हाई-प्रोफाइल मामले में अगला बड़ा फैसला सामने आएगा।

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