
Ranchi: रांची के तुपुदाना स्थित राजेंद्र नर्सिंग होम पर इलाज में घोर लापरवाही का गंभीर आरोप लगा है। नामकुम के खरसीदाग तोरार निवासी कार्तिक मुंडा की पत्नी और पुलिस महकमे में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात सुमित्रा कच्छप की प्रसव के बाद मौत हो गई थी। अब इस मामले में पति ने तुपुदाना थाना प्रभारी को आवेदन देकर अस्पताल प्रशासन और डॉक्टर संध्या कुमारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

आवेदन में क्या बताया गया पूरा घटनाक्रम?
पति कार्तिक मुंडा की ओर से दिए गए आवेदन के मुताबिक, 15 सितंबर की सुबह 8:30 बजे वे अपनी गर्भवती पत्नी को प्रसव के लिए राजेंद्र नर्सिंग होम लेकर पहुंचे थे। सुबह 9:10 बजे उन्हें ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया, जहां डॉक्टर संध्या कुमारी ने सिजेरियन ऑपरेशन कर उनकी डिलीवरी कराई। ऑपरेशन के बाद सुमित्रा ने ढाई किलोग्राम के स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।

दर्द बढ़ा, सिर्फ इंजेक्शन देकर हुई औपचारिकता
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि प्रसव के बाद जब सुमित्रा को असहनीय दर्द और सांस लेने में तकलीफ शुरू हुई, तो ड्यूटी पर मौजूद नर्सों ने स्थिति की गंभीरता को समझने के बजाय सिर्फ एक इंजेक्शन देकर मामले को टाल दिया। पति का कहना है कि सही समय पर उचित इलाज न मिलने के कारण उनकी पत्नी की हालत लगातार बिगड़ती चली गई और आखिरकार वे बेहोश हो गईं।
आधी रात को रेफर किया गया, नहीं बच सकी जान
आरोप के मुताबिक स्थिति बेकाबू होते देख राजेंद्र नर्सिंग होम के कर्मचारियों ने 16 सितंबर की रात करीब 1:50 बजे आनन-फानन में मरीज को देवनिका अस्पताल के लिए रेफर किया। हालांकि तब तक बहुत देर हो चुकी थी और देवनिका अस्पताल में इलाज के दौरान ही सुमित्रा कच्छप की मौत हो गई। परिजनों का सीधा आरोप है कि डॉक्टर संध्या कुमारी और अस्पताल स्टाफ की लापरवाही ही इस दुखद घटना की मुख्य वजह बनी।
पुलिस एसोसिएशन ने भी उठाई आवाज
इस पूरी घटना पर झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने भी गहरा दुख और आक्रोश जताया है। एसोसिएशन के संयुक्त सचिव राकेश पांडेय ने निजी अस्पतालों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब तक ऐसे गैर-जिम्मेदार निजी नर्सिंग होम और डॉक्टरों पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक आम लोग स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों की भेंट चढ़ते रहेंगे। उन्होंने राज्य के स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही तय करने की भी मांग उठाई। साथ ही तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि अगर जनप्रतिनिधि और स्वास्थ्य प्रशासन समय रहते इस मामले का संज्ञान लेते, तो शायद एक महिला पुलिस अधिकारी की जान बचाई जा सकती थी। अब परिजनों और पुलिस एसोसिएशन की मांग है कि इस मामले में जल्द से जल्द निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।


