
Ranchi: मद्रास हाईकोर्ट ने पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को सेवानिवृत्त IPS अधिकारी जी. संपत कुमार की ओर से दायर तीन नई याचिकाओं पर अपना जवाब देने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति के. गोविंदराजन थिलाकवाड़ी की पीठ ने गुरुवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए धोनी को अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया है, और अब इस मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी।

कहां से शुरू हुआ था यह पूरा विवाद?
यह मामला साल 2013 के आईपीएल सट्टेबाजी विवाद से जुड़ा हुआ है। इसकी शुरुआत तब हुई जब संपत कुमार ने एक टेलीविजन बहस के दौरान धोनी पर उस विवाद में शामिल होने का आरोप लगाया था। इस आरोप से आहत धोनी ने साल 2014 में मद्रास हाईकोर्ट का रुख किया और दावा किया कि इस बयान से उनकी छवि और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। धोनी ने इसके लिए 100 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग भी की थी।

सीडी को दस्तावेज में बदलने का दिया गया था आदेश
इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पहले सीडी में मौजूद सामग्री को लिखित दस्तावेज के रूप में तैयार करने का निर्देश दिया था। इसी सिलसिले में पिछले साल फरवरी में धोनी को इस सामग्री के अनुवाद और टाइपिंग पर आने वाला करीब 10 लाख रुपये का खर्च खुद वहन करने का आदेश भी दिया गया था।
अब दाखिल हुईं तीन नई हस्तक्षेप याचिकाएं
इसी मामले में अब संपत कुमार की ओर से तीन नई हस्तक्षेप याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इन याचिकाओं में मांग की गई है कि धोनी का बयान किसी न्यायिक अधिकारी की निगरानी में दर्ज कराया जाए, गवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य रूप से कराई जाए और उसकी प्रतियां भी उपलब्ध कराई जाएं। इसके अलावा याचिकाओं में यह भी कहा गया है कि धोनी की गवाही अदालत परिसर या किसी सरकारी भवन में ही करवाई जानी चाहिए।


