
पटना। जमुई कांड की नाबालिग पीड़िता और उसके परिवार से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई एक तस्वीर को लेकर विवाद शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री के आधिकारिक X हैंडल से परिवार के साथ तस्वीर पोस्ट की गई थी, जिसे बाद में हटा दिया गया। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पोस्ट का स्क्रीनशॉट साझा कर सवाल उठाए, जबकि राजद सांसद मीसा भारती FIR की मांग को लेकर सचिवालय थाने पहुंचीं।

CM से मिलने पटना पहुंचा था पीड़ित परिवार
जमुई कांड के बाद पीड़िता का परिवार 24 सितंबर को पटना पहुंचा था। परिवार ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की। अधिकारियों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने परिवार को जल्द न्याय का भरोसा दिया और आरोपियों के खिलाफ एक महीने के भीतर स्पीडी ट्रायल के जरिए कड़ी सजा सुनिश्चित करने की बात कही।

मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री के आधिकारिक X हैंडल से परिवार के साथ एक तस्वीर पोस्ट की गई। तस्वीर कुछ देर बाद हटा दी गई। इस पोस्ट को लेकर विवाद इसलिए खड़ा हुआ क्योंकि विपक्ष ने आरोप लगाया कि तस्वीर से नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर होने का खतरा पैदा हुआ। कुछ रिपोर्टों में तस्वीर को ब्लर बताया गया है, जबकि विपक्ष ने इसे पहचान उजागर करने वाला बताया है।
तेजस्वी यादव ने POCSO को लेकर उठाया सवाल
तस्वीर हटाए जाने के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पोस्ट का स्क्रीनशॉट साझा किया और मुख्यमंत्री पर POCSO के प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पुलिस पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो को लेकर कार्रवाई कर रही है, तो मुख्यमंत्री के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से तस्वीर पोस्ट किए जाने के मामले में क्या कार्रवाई होगी।
POCSO Act की धारा 23(2) के तहत मीडिया में बच्चे की पहचान बताने वाले नाम, पता, फोटो, परिवार की जानकारी, स्कूल, पड़ोस या किसी अन्य पहचान योग्य विवरण को प्रकाशित करने पर रोक है। वहीं JJ Act की धारा 74 भी बच्चे की तस्वीर या पहचान उजागर करने वाले विवरण के प्रकाशन पर रोक लगाती है।
हालांकि, इस विशेष मामले में मुख्यमंत्री की पोस्ट से कानून का उल्लंघन हुआ या नहीं, यह संबंधित तथ्यों और सक्षम कानूनी प्राधिकारी के आकलन का विषय है।
मीसा भारती FIR की मांग लेकर पहुंचीं थाना
तेजस्वी यादव के बाद राजद सांसद मीसा भारती भी मामले को लेकर सचिवालय थाना पहुंचीं। उन्होंने मुख्यमंत्री के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की और POCSO एक्ट की धारा 23 तथा जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 74 का हवाला दिया।
मीसा भारती ने सवाल उठाया कि जब पीड़िता की पहचान वाले वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने वालों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई कर रही है, तो तस्वीर पोस्ट किए जाने के मामले में भी समान कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। रिपोर्टों के अनुसार, थाने में उनकी शिकायत पर तत्काल FIR दर्ज नहीं हुई।
जमुई कांड के बाद पहचान उजागर करने पर भी कार्रवाई
19 सितंबर को जमुई में कोचिंग से लौट रहे एक नाबालिग लड़के और लड़की को कथित तौर पर कुछ युवकों ने रास्ते में रोककर उनके साथ मारपीट और बदसलूकी की थी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपियों की गिरफ्तारी की कार्रवाई की।
घटना के वीडियो और पीड़िता की पहचान से जुड़ी सामग्री सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद पुलिस ने ऐसे अकाउंट्स के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की। इसी पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री के X पोस्ट को लेकर नया विवाद खड़ा हुआ है। फिलहाल इस मामले में तस्वीर पोस्ट किए जाने को लेकर विपक्ष की ओर से FIR और कार्रवाई की मांग की जा रही है।


