
Jharkhand DGP Controversy: झारखंड में पुलिस महानिदेशक यानी DGP की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच तकरार एक बार फिर गहरा गई है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी दाखिल कर आरोप लगाया है कि झारखंड सरकार द्वारा वर्ष 2025 में बनाई गई डीजीपी नियुक्ति नियमावली में शीर्ष अदालत के ऐतिहासिक प्रकाश सिंह मामले के दिशानिर्देशों का सीधे तौर पर उल्लंघन किया गया है।

UPSC की भूमिका को नजरअंदाज करने का आरोप
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने इस नियमावली को अधिसूचित करने से पहले सुप्रीम कोर्ट से पूर्व अनुमति भी नहीं ली थी। केंद्र का कहना है कि संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC की वैधानिक भूमिका को नजरअंदाज कर बनाई गई यह पूरी प्रक्रिया नियमों और स्थापित कानूनों के विपरीत है। केंद्र ने अपनी आवेदन में मांग की है कि 2025 की इस नियमावली के तहत की गई सभी DGP नियुक्तियों को अवैध और अमान्य घोषित किया जाए।

9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में होगी अगली सुनवाई
उल्लेखनीय है कि इससे पहले मई 2026 में भी सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड में नियमित डीजीपी की नियुक्ति को लेकर राज्य की स्थिति पर संज्ञान लिया था और राज्य सरकार को अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। अब इस पूरे विवादित मामले पर सुप्रीम कोर्ट में अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 9 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।


