
Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने वैवाहिक भरण-पोषण (मेंटेनेंस) से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था दी है। जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की एकल पीठ ने स्पष्ट किया है कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125(3) के तहत किसी एक डिफॉल्ट के लिए पति को बार-बार 30-30 दिनों की अवधि के लिए जेल में नहीं रखा जा सकता। अदालत ने साफ तौर पर कहा कि इस कानूनी प्रावधान के तहत अधिकतम सजा की सीमा केवल एक माह ही निर्धारित है, इसलिए एक ही बकाए के आधार पर किसी व्यक्ति को लगातार हिरासत में रखना कानून के सिद्धांतों के विपरीत है।

दुमका फैमिली कोर्ट ने 23 बार भेजा था रिमांड पर
यह मामला दुमका निवासी दशरथ सिंह से जुड़ा हुआ है। भरण-पोषण की राशि जमा न करने के कारण दुमका की फैमिली कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें लगातार 23 बार 30-30 दिनों के रिमांड पर जेल भेज दिया था। इस आदेश के चलते याचिकाकर्ता लंबे समय से जेल में ही बंद थे। फैमिली कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।

फैमिली कोर्ट का आदेश निरस्त, तुरंत रिहाई के निर्देश
मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने दुमका फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश को पूरी तरह गैर-कानूनी करार देते हुए निरस्त कर दिया। पीठ ने रेखांकित किया कि कानून की मंशा किसी व्यक्ति को एक ही विफलता के लिए अनिश्चितकाल तक जेल में बंद रखने की नहीं है। इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने संबंधित जेल प्रशासन और अधिकारियों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता दशरथ सिंह को तत्काल प्रभाव से जेल से रिहा किया जाए।


