
Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने विदेश में उच्च शिक्षा के लिए चयनित राज्य के होनहार छात्र को छात्रवृत्ति राशि का भुगतान नहीं किए जाने पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। जस्टिस राजेश शंकर की एकल पीठ ने राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद को सख्त हिदायत देते हुए निर्देश दिया है कि ब्रिटेन की प्रतिष्ठित ‘यूनिवर्सिटी ऑफ साउथेम्प्टन’ में नामांकन के लिए चयनित छात्र को 5 अक्टूबर तक हर हाल में स्वीकृत छात्रवृत्ति राशि जारी की जाए। अदालत ने दो टूक चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समयसीमा तक छात्र के खाते में राशि ट्रांसफर नहीं होती है, तो राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद के कार्यकारी निदेशक को 6 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में सशरीर हाजिर होना होगा।

मंजूरी मिलने के बाद भी फंड अटकाने पर अदालत ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि जब छात्रवृत्ति की विधिवत स्वीकृति दी जा चुकी थी, तो फिर राशि का भुगतान करने में अनावश्यक देरी क्यों की गई। कोर्ट ने उच्चतर शिक्षा परिषद के कार्यकारी निदेशक को आदेश दिया कि प्रार्थी छात्र, कांके (रांची) निवासी सनत झा को अविलंब फंड मुहैया कराया जाए ताकि उसकी पढ़ाई में कोई अड़चन न आए। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 6 अक्टूबर की तिथि निर्धारित की है।

यूके की यूनिवर्सिटी में सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के लिए हुआ है चयन
इससे पूर्व अदालत में प्रार्थी छात्र की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र कृष्ण ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को अवगत कराया कि छात्र सनत झा का चयन यूनाइटेड किंगडम (UK) की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ऑफ साउथेम्प्टन में तीन वर्षीय ‘बी. इंजीनियरिंग सॉफ्टवेयर (कंप्यूटर साइंस एंड इंफॉर्मेशन सिस्टम)’ पाठ्यक्रम के लिए हुआ है। छात्र ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के 9 जुलाई 2024 के संकल्प के तहत विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति के लिए विधिवत आवेदन किया था।
39.76 लाख रुपये की स्वीकृति, फिर भी छात्र दर-दर भटकने को मजबूर
अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि छात्र की योग्यता और सभी आवश्यक अहर्ताओं की जांच के बाद राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद के कार्यकारी निदेशक ने खुद 9 सितंबर 2026 को छात्रवृत्ति स्वीकृति पत्र जारी किया था। उसी दिन 39,76,655.20 रुपये (करीब 39.76 लाख रुपये) की छात्रवृत्ति राशि के भुगतान से संबंधित आधिकारिक पत्र भी जारी कर दिया गया था। इसके बावजूद विभागीय लापरवाही और हीला-हवाली के चलते राशि का वास्तविक भुगतान नहीं किया गया। समय पर फीस जमा न होने के कारण छात्र का नामांकन खतरे में पड़ रहा था, जिसके चलते उसने हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल कर अविलंब राशि जारी कराने की गुहार लगाई थी। हाईकोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई है।


