
Ranchi:झारखंड हाईकोर्ट में सोमवार को प्रारंभिक विद्यालय प्रशिक्षित सहायक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में अपनाए गए नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूले की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर अहम सुनवाई हुई। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने मामले की तकनीकी जटिलता और अभ्यर्थियों के हितों को देखते हुए BIT मेसरा के रजिस्ट्रार को इस प्रकरण में पक्षकार (पार्टी) बनाने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने BIT मेसरा प्रबंधन को विषय विशेषज्ञों की एक स्वतंत्र कमेटी गठित करने का स्पष्ट आदेश दिया है।

एक्सपर्ट कमेटी जांचेगी फॉर्मूले की सटीकता और प्रक्रिया
अदालत के निर्देशानुसार गठित होने वाली इस विशेष कमेटी में सांख्यिकी और संबंधित विषयों के शीर्ष विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। यह तकनीकी कमेटी इस बात की सूक्ष्म पड़ताल करेगी कि JSSC द्वारा परीक्षा परिणामों के मूल्यांकन के लिए इस्तेमाल किया गया नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूला वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सही है अथवा नहीं। इसके अतिरिक्त कमेटी यह भी सुनिश्चित करेगी कि इस फॉर्मूले को लागू करने के दौरान निर्धारित मानकों और उचित प्रशासनिक प्रक्रिया का पूरी तरह पालन हुआ था या इसमें कोई विसंगति रह गई थी।

अक्टूबर में होगी मामले की अगली सुनवाई
न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने दोनों पक्षों की प्राथमिक दलीलें सुनने के बाद इस मामले की अगली सुनवाई अक्टूबर महीने में निर्धारित की है। तब तक विशेषज्ञ कमेटी द्वारा अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट या समीक्षा प्रक्रिया से जुड़ा विवरण अदालत के समक्ष पेश किए जाने की संभावना है।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अदालत में रखा पक्ष
इस परीक्षा में अपनाए गए नॉर्मलाइजेशन के तौर-तरीकों के खिलाफ गिरधर प्रसाद एवं अन्य अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में वरीय अधिवक्ता अजित कुमार, अधिवक्ता चंचल जैन, अमृतांश वत्स और शुभम मिश्रा ने पक्ष रखते हुए फॉर्मूले में मौजूद कथित खामियों को उजागर किया। वहीं दूसरी तरफ झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) का पक्ष अधिवक्ता संजोय पिपरवाल ने रखा। अब सबकी नजरें BIT मेसरा के विशेषज्ञों की आगामी रिपोर्ट पर टिकी हैं।


