
Jharkhand High Court: झारखंड HC ने खूंटी के चिरीबेरा में 35 साल पहले जमीन विवाद को लेकर हुए तिहरे हत्याकांड में छह दोषियों की उम्रकैद की सजा को पूरी तरह बरकरार रखा है। अदालत ने दोषियों की ओर से दायर क्रिमिनल अपील को सिरे से खारिज करते हुए निचली अदालत के पुराने फैसले में किसी भी तरह का दखल देने से साफ मना कर दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने मामले से जुड़े जौर पहान को जानलेवा हमले के तहत सुनाई गई 10 साल की कठोर सजा को भी यथावत रखा है। हाईकोर्ट ने सभी छह दोषियों के जमानत बांड को तत्काल प्रभाव से रद्द करते हुए उन्हें तय समय में निचली अदालत में सरेंडर कर अपनी पूरी सजा भुगतने का सख्त निर्देश दिया है।

अपील के दौरान 7 आरोपियों की हो चुकी है मौत, HC ने दिया सरेंडर का अल्टीमेटम
न्यायमूर्ति एसएन प्रसाद और न्यायमूर्ति पीके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने इस आपराधिक अपील पर अंतिम फैसला सुनाते हुए निचली अदालत को भी स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि यदि दोषी तय मियाद के भीतर आत्मसमर्पण नहीं करते हैं, तो निचली अदालत उनकी गिरफ्तारी और हिरासत सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कानूनी कदम उठाए। बता दें कि इस मामले में निचली अदालत ने 28 जुलाई 1998 को कुल 13 आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी। हालांकि दशकों तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया और अपील की सुनवाई के दौरान ही सात आरोपियों की मौत हो गई, जिसके बाद जीवित बचे छह दोषियों की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही थी।

1991 में खेत जुताई के दौरान हुआ था हमला, मेडिकल साक्ष्यों के आधार पर फैसला
यह विवाद 1 फरवरी 1991 का है, जब गोबर्धन सिंह मानकी और उनके परिवार के लोग चिरीबेरा स्थित खेत में जुताई कर रहे थे। उसी दौरान जमीन पर मालिकाना हक को लेकर दूसरे पक्ष के लोग धारदार हथियारों से लैस होकर पहुंचे और अचानक हमला बोल दिया। इस हमले में मंगल सिंह मानकी और हरिनाथ मानकी की मौके पर ही जान चली गई थी, जबकि गंभीर रूप से घायल चिंतामणि मानकी ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। सुनवाई के दौरान HC ने घटना में घायल चश्मदीद गवाह की गवाही और पुख्ता मेडिकल रिपोर्ट्स को बेहद अहम माना और स्पष्ट किया कि जमीन विवाद की आड़ में किए गए इतने बड़े अपराध में दोषियों को कोई रियायत नहीं दी जा सकती।


