
Giridih: गिरिडीह नगर थाना पुलिस ने सोमवार दोपहर कोर्ट परिसर में उस वक्त भारी फजीहत का सामना किया, जब फरार आरोपी को गिरफ्तार करने पहुंचे अधिकारियों को वकीलों के कड़े विरोध के बाद उल्टे पांव पीछे हटना पड़ा। दरअसल, नगर थाना के SI सत्येंद्र पाल ने मारपीट के एक पुराने मामले में जमानत बांड भरने आए अभिषेक साहू को कोर्ट परिसर से दबोच लिया। गिरफ्तारी होते ही कोर्ट के बाहर कई नामचीन और चर्चित अधिवक्ताओं की भीड़ जमा हो गई और उन्होंने पुलिस टीम को घेरकर जमकर हंगामा किया।

मारपीट में मिली थी जमानत, वकीलों ने पूछा गिरफ्तारी का आधार
हंगामे के दौरान वकीलों ने पुलिस से सवाल दागा कि जब मारपीट के मामले में न्यायालय से अभिषेक को पहले ही जमानत मिल चुकी है, तो उसे किस आधार पर हिरासत में लिया जा रहा है। वकीलों का कहना था कि अभिषेक सिर्फ अपना छूटा हुआ बेल बांड भरने आया था। इस पर SI सत्येंद्र पाल ने सफाई दी कि अभिषेक पर अपने पिता और जमुआ के नवडिहा ओपी के मुखिया बिनोद साहू को गिरिडीह कोर्ट से अपनी बाइक से भगाने का गंभीर आरोप है। इसी बाइक नंबर के आधार पर नगर थाने में उसके खिलाफ FIR दर्ज की गई थी और पुलिस उसी केस में कार्रवाई करने पहुंची थी।

कोर्ट से मिला था ‘नो कोर्सिव’ का स्टे, अनजान रही पुलिस
बहस के बीच अभिषेक साहू के अधिवक्ता ने पुलिस अधिकारियों को आईना दिखाते हुए बताया कि न्यायालय ने अभिषेक साहू के खिलाफ 7 अक्टूबर तक किसी भी तरह की उत्पीड़क या दंडात्मक (नो कोअर्सिव) कार्रवाई करने पर रोक लगा रखी है। अधिवक्ता द्वारा कोर्ट का स्टे ऑर्डर दिखाए जाने के बाद नगर थाना पुलिस के हाथ-पांव फूल गए। पुलिस अधिकारियों को इस नो कोअर्सिव आदेश की पहले से कोई जानकारी ही नहीं थी।
गलती का अहसास होते ही पुलिस ने आरोपी को छोड़ा
न्यायालय के सख्त आदेश और वकीलों के भारी आक्रोश को देखते हुए नगर थाना पुलिस को तुरंत बैकफुट पर आना पड़ा और उन्होंने अभिषेक साहू को मौके पर ही छोड़ दिया। हालांकि, पुलिस जांच अधिकारी (IO) सत्येंद्र पाल की इस लापरवाही और जानकारी के अभाव के कारण बार एसोसिएशन और कोर्ट परिसर के बाहर काफी देर तक अफरा-तफरी और गहमागहमी का माहौल बना रहा।


