
Bokaro: बोकारो जिले के तेतुलिया मौजा में हुए बहुचर्चित वन भूमि घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने मुख्य आरोपी शैलेश सिंह के खिलाफ सक्षम अदालत में अभियोजन रिपोर्ट (चार्जशीट) दाखिल करते हुए उसकी करीब दो करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को कुर्क कर लिया है। जब्त की गई संपत्तियों में आरोपी का बिहार की राजधानी पटना स्थित आलीशान मकान और उसके पैतृक गांव में स्थित कीमती जमीन शामिल है।

शैलेश सिंह और उनके बेटे समेत सात बने नामजद आरोपी
ED ने वन भूमि के अवैध नामांतरण और मनी लॉन्ड्रिंग के इस बड़े खेल में कुल सात लोगों और कंपनियों को आरोपी बनाया है। इनमें शैलेश सिंह, उसका बेटा आयुष, उमायुष मल्टिकॉम, इजहार हुसैन, अख्तर हुसैन, पुनीत अग्रवाल और राजवीर कंस्ट्रक्शन शामिल हैं। जांच एजेंसी ने अदालत के समक्ष पेश रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि इन सभी ने मिलकर संगठित तरीके से सरकारी वन भूमि की बंदरबांट की योजना बनाई थी।

फर्जी कागजात बनाकर बेची गई 103 एकड़ वन भूमि
ED की जांच रिपोर्ट में बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार तेतुलिया मौजा की लगभग 103 एकड़ वन भूमि को सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर और फर्जी दस्तावेजों के जरिए अवैध तरीके से म्यूटेशन यानी नामांतरण कराया गया। इसके बाद इस बेशकीमती वन भूमि की खुलेआम अवैध खरीद-बिक्री की गई।
चार करोड़ से अधिक का लेन-देन, खारिज हुआ डेवलपमेंट एग्रीमेंट
जांच में यह बात भी पुख्ता हुई है कि राजवीर कंस्ट्रक्शन ने इस भूमि सौदे के एवज में उमायुष मल्टिकॉम को चार करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि का भुगतान किया था। बचाव पक्ष की ओर से इस पूरे मामले को वैध ठहराने के लिए डेवलपमेंट एग्रीमेंट की जो दलील दी गई थी, उसे ED ने अपनी जांच में पूरी तरह खारिज कर दिया है। एजेंसी ने साक्ष्यों के आधार पर साबित किया है कि एग्रीमेंट केवल काले धन को सफेद करने और वन भूमि पर कब्जा जमाने का एक हथकंडा था।


