
Naxatra Digital Desk: झारखंड में रुबेला वायरस के संक्रमण को लेकर सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही खबरों को RIMS के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

विभाग के HOD डॉ. मनोज कुमार ने साफ किया है कि राज्य में रुबेला का कोई नया मरीज नहीं मिला है और सोशल मीडिया पर सिमडेगा की एक बच्ची को लेकर चल रही संक्रमण की खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि साल 2018 के बाद से झारखंड में रुबेला का एक भी पॉजिटिव मामला सामने नहीं आया है।

क्या है एंटीबॉडी पॉजिटिव आने का सच?
डॉ. मनोज कुमार ने जानकारी दी कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अभियान के तहत झारखंड से कुल 875 सैंपल जांच के लिए RIMS भेजे गए थे। इनमें से 21 सैंपल में एंटीबॉडी पॉजिटिव पाई गई है, लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं है कि यह कोई सक्रिय संक्रमण है।
दरअसल, बच्चों को 9 महीने की उम्र में MMR का टीका लगाया जाता है, जिसके कारण शरीर में एंटीबॉडी बनती है। स्वास्थ्य विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और बच्चों का नियमित टीकाकरण जरूर करवाएं।
स्वास्थ्य व्यवस्था को मिलेगी हाई-टेक तकनीक की रफ्तार
दूसरी ओर, झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने के लिए राज्य सरकार ने बड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में आगामी 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को रांची के होटल BNR में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय हेल्थ टेक्नोलॉजी कॉन्क्लेव का आयोजन किया जाएगा। इस हाई-प्रोफाइल कॉन्क्लेव में देश-विदेश के स्वास्थ्य विशेषज्ञ, चिकित्सा पेशेवर और दिग्गज टेक कंपनियां हिस्सा लेंगी।
टेलीमेडिसिन और रोबोटिक सर्जरी पर रहेगा जोर
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने बताया कि इस कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य झारखंड की स्वास्थ्य सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक तकनीक और डिजिटल हेल्थ को बड़े पैमाने पर जोड़ना है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि रोबोटिक तकनीक के जरिए जटिल ऑपरेशनों को कम समय में सफलतापूर्वक पूरा किया जाए, साथ ही दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को टेलीमेडिसिन के जरिए घर बैठे ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जा सकें।


