
Hazaribagh: हजारीबाग की विशेष पॉक्सो अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के गंभीर मामले में कड़ा फैसला सुनाते हुए दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। विशेष पॉक्सो न्यायाधीश आसिफ इकबाल की कोर्ट ने सुनवाई पूरी होने के बाद पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला दिया। अदालत ने दोषी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जिसे अदा न करने की स्थिति में छह माह की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।

अलग-अलग धाराओं में सजा, दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी
कोर्ट ने भारतीय दंड विधान की धारा 376(3) के तहत दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। इसके साथ ही धारा 376(2) के तहत 10 वर्ष की बामशक्कत कैद और 10 हजार रुपये अर्थदंड का आदेश दिया। अदालत के निर्देश के अनुसार ये दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी। इसके अलावा जांच और ट्रायल के दौरान आरोपी द्वारा जेल में बिताई गई कुल अवधि को इस सजा की मियाद में समायोजित किया जाएगा।

स्कूल आते-जाते करता था तंग, घर में अकेला पाकर की थी दरिंदगी
यह पूरा मामला विशेष पॉक्सो वाद संख्या 76/2023 और कोर्रा थाना कांड संख्या 141/2023 से जुड़ा हुआ है। पीड़िता के परिजनों द्वारा दिए गए लिखित आवेदन के अनुसार दोषी नाबालिग छात्रा को स्कूल आते-जाते समय अक्सर तंग किया करता था। परिजनों ने जब इसका विरोध किया तो वह उल्टे उन्हें डराने-धमकाने लगा। इसी बीच एक दिन जब घर पर कोई मौजूद नहीं था, आरोपी जबरन घर के अंदर दाखिल हुआ और नाबालिग के साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। घटना के तुरंत बाद पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया था।
अभियोजन पक्ष ने पेश किए 9 प्रदर्श, अदालत ने माना दोषी
अदालत में मामले के विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर मीनाक्षी कंडुलना ने प्रभावी पैरवी की। उन्होंने अदालत के समक्ष पीड़िता और IO समेत कई गवाहों के बयान दर्ज कराए और कुल नौ ठोस प्रदर्श पेश किए। दोनों पक्षों की जिरह पूरी होने और साक्ष्यों की पुष्टि के बाद विशेष पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी को नाबालिग से दरिंदगी का दोषी पाते हुए सलाखों के पीछे भेज दिया।


