
New Delhi: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने सोमवार को भीलवाड़ा में चातुर्मास कर रहे राष्ट्रसंत आचार्य पुलकसागर महाराज से मुलाकात की। सूर्यमहल स्थित चातुर्मास स्थल पर दोनों के बीच करीब 40 मिनट तक बातचीत हुई।

इस दौरान सामाजिक समरसता, जैन तीर्थस्थलों के संरक्षण, गौवंश संवर्धन और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों पर चर्चा हुई। बातचीत में राजनीति से अलग सामाजिक एकता और आपसी सद्भाव को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

सामाजिक बंटवारे से बचने पर जोर
आचार्य पुलकसागर महाराज ने समाज में एकता और समरसता बनाए रखने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि समाज को अलग-अलग वर्गों में बांटने वाली कोशिशों से बचना चाहिए। बातचीत के दौरान उन्होंने सवर्ण और पिछड़े वर्ग के बीच किसी तरह का विभाजन पैदा नहीं होने देने की बात भी रखी।
उन्होंने सम्मेद शिखरजी, गिरनार समेत जैन समाज के प्रमुख तीर्थस्थलों के संरक्षण का मुद्दा भी उठाया। आचार्यश्री ने इन तीर्थस्थलों से जुड़ी चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया, जिस पर डॉ. भागवत ने उचित स्तर पर चर्चा कर समाधान की दिशा में प्रयास का भरोसा दिया।
जेलों में गौशाला बनाने का सुझाव
मुलाकात के दौरान आचार्य पुलकसागर ने देश की जेलों में गौशालाएं स्थापित करने का सुझाव भी दिया। उनका कहना था कि इससे बंदियों को गौवंश की सेवा और संवर्धन जैसे कामों से जोड़ा जा सकता है।
उन्होंने सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए जाति से ऊपर उठकर शांति और सद्भाव की दिशा में मिलकर काम करने की जरूरत बताई। आचार्यश्री ने संघ की ओर से राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया।
अमेरिका और ब्रिटेन यात्रा के अनुभव साझा किए
बातचीत के दौरान डॉ. मोहन भागवत ने अपनी हालिया अमेरिका और ब्रिटेन यात्रा के अनुभव भी आचार्य पुलकसागर महाराज के साथ साझा किए। मुलाकात की शुरुआत में डॉ. भागवत ने आचार्यश्री का पाद प्रक्षालन कर वंदन-अभिनंदन किया, जिसके बाद आचार्य पुलकसागर ने उन्हें आशीर्वाद दिया।
‘एक और मुक्तिदूत’ पुस्तक का विमोचन
इस मौके पर डॉ. भागवत ने इंदौर निवासी सरोज शाह द्वारा आचार्य पुलकसागर महाराज के जीवन पर लिखी पुस्तक ‘एक और मुक्तिदूत’ का विमोचन किया। पुस्तक को आचार्यश्री को समर्पित किया गया।
कार्यक्रम में RSS के अखिल भारतीय सह प्रचारक प्रमुख अरुण जैन, क्षेत्र प्रचारक निंबाराम, प्रांत प्रचारक मुरलीधर और श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी मौजूद रहे।
समिति अध्यक्ष प्रवीण चौधरी के मुताबिक, वर्ष 2011 में भी आचार्य पुलकसागर महाराज के भीलवाड़ा प्रवास के दौरान डॉ. भागवत उनसे मिलने पहुंचे थे। इसके बाद भी दोनों के बीच समय-समय पर मुलाकात होती रही है।


