
मोतिहारी: पूर्वी चंपारण के आदापुर थाना क्षेत्र में पूर्व मंत्री श्यामबिहारी प्रसाद के पैतृक गांव भेड़ियारी स्थित निजी आवास में हुई भीषण चोरी का मामला एक माह बाद भी अनसुलझा है। घटना के बाद FIR दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की थी, लेकिन एक महीने का समय बीत जाने के बावजूद न तो किसी आरोपी की गिरफ्तारी हो सकी है और न ही चोरी की संपत्ति बरामद हुई है। पुलिस की इस कथित सुस्ती को लेकर अब सवाल खड़े होने लगे हैं।

बताया जाता है कि करीब एक माह पूर्व पूर्व मंत्री की गैरमौजूदगी में अज्ञात चोर उनके घर में घुसे और लाखों रुपये मूल्य की संपत्ति लेकर फरार हो गए। घटना की सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की गई। लेकिन समय बीतने के साथ मामला ठंडा पड़ता नजर आया। हाई-प्रोफाइल चोरी के बावजूद पुलिस के हाथ अब तक कोई ठोस सुराग नहीं लगना जांच की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रहा है।

एक महीने बाद भी पुलिस के हाथ खाली
चोरी की इस घटना को एक महीना पूरा हो चुका है। बावजूद इसके पुलिस न तो कथित चोरों की पहचान कर पाई है और न ही चोरी गए सामान का पता लगा सकी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर जांच किस दिशा में आगे बढ़ रही है? क्या तकनीकी जांच और संभावित संदिग्धों की पड़ताल का कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया?
जिले में लगातार चोरी की घटनाएं सामने आने के बीच पूर्व मंत्री के घर हुई चोरी का उद्भेदन नहीं होना पुलिस के लिए भी चुनौती बन गया है। आम लोगों का कहना है कि जब एक पूर्व मंत्री का आवास भी चोरों से सुरक्षित नहीं है तो सामान्य लोगों की सुरक्षा को लेकर पुलिस की मुस्तैदी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
पूर्व मंत्री ने जताई नाराजगी, आंदोलन की चेतावनी
मामले को लेकर पूर्व मंत्री श्यामबिहारी प्रसाद ने अब कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि जब उनका घर सुरक्षित नहीं है तो आम नागरिकों की सुरक्षा का क्या होगा। पूर्व मंत्री ने बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर मोतिहारी एसपी और बेतिया डीआईजी से भी बात की है।
उन्होंने पुलिस प्रशासन से लंबित चोरी के मामलों में तेजी लाने और अपराधियों की गिरफ्तारी की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि चोरी कांड का जल्द उद्भेदन नहीं हुआ तो महागठबंधन की ओर से आंदोलन किया जाएगा।
अब सवाल सिर्फ पूर्व मंत्री के घर हुई चोरी के उद्भेदन का नहीं, बल्कि आदापुर और आसपास लगातार हो रही चोरी की घटनाओं पर पुलिस की कार्रवाई का भी है। एक माह बाद भी पुलिस की जांच अगर किसी निर्णायक नतीजे तक नहीं पहुंची है, तो पुलिस प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई और अपराधियों तक पहुंचने में आखिर बाधा कहां है?
(प्रतिक सिंह की रिपोर्ट)


