
मोतिहारी: करोड़ों रुपये की लागत, बड़े स्तर पर निरीक्षण और तामझाम के साथ उद्घाटन… लेकिन उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद मजुरहा स्थित धनौती नदी पर बने आरसीसी पुल का एप्रोच पथ सवालों के घेरे में आ गया है। 13 करोड़ 71 लाख रुपये की लागत से बने पुल के एप्रोच पथ में करीब 10 से 15 मीटर लंबी दरार सामने आने के बाद निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

उद्घाटन के कुछ दिन बाद ही एप्रोच पथ में दरार
धनौती नदी पर बने इस पुल को इलाके की कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण परियोजना माना गया था। लेकिन पुल के उद्घाटन के चंद दिनों बाद ही एप्रोच पथ में लंबी दरार दिखाई देने लगी।

दरार सामने आने के बाद स्थानीय लोगों के बीच भी निर्माण की गुणवत्ता को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। लोगों का सवाल है कि अगर सड़क और एप्रोच पथ का निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार किया गया था, तो इतनी कम अवधि में इसमें इतनी लंबी दरार कैसे आ गई?
हालांकि एप्रोच पथ में दरार पड़ने की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं है। इसके लिए तकनीकी जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।
जिस परियोजना पर बड़े स्तर पर रहा फोकस, वही अब सवालों में
धनौती नदी पुल की परियोजना इसलिए भी चर्चा में रही है क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी प्रगति यात्रा के दौरान इसका शिलान्यास किया था। निर्माण के दौरान परियोजना का निरीक्षण भी किया गया था। हाल ही में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने समारोह के बीच इस पुल का उद्घाटन किया।
ऐसे में उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद एप्रोच पथ में दरार सामने आने से निर्माण एजेंसी के साथ-साथ निगरानी और गुणवत्ता जांच की व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
10 प्रखंडों की कनेक्टिविटी से जुड़ा है पुल
धनौती नदी पर पुल बनने से आसपास के करीब 10 प्रखंडों के लोगों को जिला मुख्यालय से बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद थी। पहले नदी के कारण लोगों को मोतिहारी पहुंचने के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ता था।
पुल के निर्माण के बाद कई इलाकों की दूरी करीब 8 से 10 किलोमीटर तक कम होने और लोगों के समय की बचत होने की बात कही जा रही है। यही वजह है कि स्थानीय लोगों के लिए यह पुल महज एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि रोजमर्रा की आवाजाही से जुड़ी महत्वपूर्ण सुविधा है।
अब तकनीकी जांच से खुलेगा दरार का राज
एप्रोच पथ में दरार की वजह क्या है, इसका पता लगाने के लिए अब तकनीकी जांच जरूरी हो गई है। जांच में निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, मिट्टी भराई, सड़क की मजबूती और निर्धारित तकनीकी मानकों के पालन की पड़ताल की जानी चाहिए।
सबसे अहम सवाल यही है कि 13.71 करोड़ रुपये की परियोजना का एप्रोच पथ उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद क्यों धंसने लगा? अगर जांच में निर्माण संबंधी कोई कमी सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी, यह भी देखने वाली बात होगी। फिलहाल दरार की वास्तविक वजह तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। स्थानीय लोगों की नजर अब प्रशासन और संबंधित विभाग की अगली कार्रवाई पर है।
(प्रतिक सिंह की रिपोर्ट)


