
मुजफ्फरपुर: सात करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी राशि की कथित हेराफेरी और आय से अधिक संपत्ति के मामले में तत्कालीन महिला सिपाही बेबी कुमारी को विशेष निगरानी अदालत ने दोषी करार दिया है। अदालत ने दोषी पाए जाने के बाद उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया। अब सजा के बिंदु पर 26 अक्टूबर 2026 को सुनवाई होगी।

वेतन और अन्य मदों की राशि खाते में ट्रांसफर करने का आरोप
यह मामला निगरानी थाना कांड संख्या 27/2012 से जुड़ा है। जांच के अनुसार वर्ष 2006 से सितंबर 2010 के बीच पुलिसकर्मियों के वेतन, टीए और अन्य मदों की सरकारी राशि में कथित वित्तीय अनियमितता की गई।

जांच में आरोप है कि तत्कालीन लेखापाल सुशील कुमार चौधरी ने अन्य आरोपियों की मिलीभगत से करीब 7 करोड़ रुपये की सरकारी राशि अलग-अलग खातों में ट्रांसफर की। इसमें बेबी कुमारी के बैंक खाते में भी राशि जमा कराए जाने की बात सामने आई थी।
तलाशी में नकदी और जेवरात बरामद
जांच के दौरान आरोपियों के आवासों की तलाशी ली गई, जहां से नकद राशि, जेवरात और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए थे। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बाद में बेबी कुमारी के खिलाफ 35,42,955 रुपये की आय से अधिक संपत्ति के आरोप की भी जांच की।
मामले में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की ओर से आरोप-पत्र दाखिल किया गया था। बिहार सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक कृष्ण देव साह ने मामले में पैरवी की।
2026 में अब तक 22 भ्रष्टाचार मामलों में दोषसिद्धि
विशेष निगरानी अदालत के फैसले के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बताया कि वर्ष 2026 में अब तक 22 भ्रष्टाचार मामलों में लोक सेवकों को दोषी ठहराया जा चुका है। वर्तमान मामले में दोषसिद्धि विशेष न्यायाधीश सुमन कुमार दिवाकर की अदालत ने की है।


